गोंडा। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से छह स्वास्थ्य योजनाएं चलाई जा रहीं हैं। इसके बावजूद महिला अस्पताल में प्रसव की संख्या घटती जा रही है। अप्रैल 2022 में 1031 प्रसव हुए थे, जबकि अप्रैल 2023 में मात्र 635 प्रसव ही हुए। इस तरह अप्रैल माह में पिछले साल की तुलना 396 प्रसव कम हुए। इससे पहले मार्च में प्रसव कम होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी फटकार लगाई थी।
अस्पताल में प्रसव होने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जननी सुरक्षा योजना, मातृ वंदना योजना, कन्या बीमा सहित कई योजनाओं का लाभ दिया जाता है। इसके बावजूद आशा बहुओं और डॉक्टर के एजेंट का संगठित गिरोह अस्पताल में प्रसव का आंकड़ा बढ़ने नहीं देता। महिला अस्पताल में आई गर्भवती महिलाओं को गुमराह कर निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। अस्पताल के गेट पर हर रोज आशाओं का जमावड़ा लगा रहता है। इनमें से अधिकांश का कोई मरीज नहीं होता, वह डॉक्टर के इशारे पर मरीजों को उनके नर्सिंग होम में ले जाती हैं।
महिला अस्पताल में तैनात अधिकांश डॉक्टरों का शहर में निजी नर्सिंग होम संचालित है। जिनका अस्पताल नहीं है, वह भी किसी न किसी निजी अस्पताल में मरीजों को भेजकर ऑपरेशन करते हैं। इन्हीं के इशारे पर आशा मरीजों को अस्पताल में ऑपरेशन रिस्की बताकर उनके निजी नर्सिंग होम ले जाती हैं। इसके चलते महिला अस्पताल में संस्थागत प्रसव की संख्या दिनोंदिन घटती जा रही है। एक स्वास्थ्यकर्मी की मानें तो निजी नर्सिंग होम ले जाने पर साधारण प्रसव के एवज में एक हजार व सिजेरियन पर पांच हजार रुपये कमीशन मिलता है।
महिला अस्पताल में लगातार प्रसव घट रहे हैं, जबकि बभनजोत, बेलसर, छपिया, करनैलगंज, हलधरमऊ, इटियाथोक, झंझरी, कटरा बाजार, मुजेहना, नवाबगंज, पड़री कृपाल, परसपुर, तरबगंज व वजीरगंज सीएचसी में संस्थागत प्रसव बढ़े हैं।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिन्हा का कहना है कि संस्थागत प्रसव बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से एनेस्थीसिया के डॉक्टर न होने के कारण ऑपरेशन की संख्या कुछ घटी है।