गोंडा में सीएमओ कार्यालय। -संवाद
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गोंडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से मिलने वाली बजट राशि के खर्च में भी जिम्मेदार पूरी तरह कंजूसी बरत रहे हैं। बजट मिलने के बाद भी इसका खर्च न कर पाने के मामले में प्रदेश में गोंडा जिला चौथ स्थान पर है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में एनएचएम के तहत आवंटित 28 करोड़ की धनराशि खर्च न हो पाने से खाते में डंप पड़ी है। बजट राशि खर्च न हो पाने से जन स्वास्थ्य से जुड़ी दर्जन भर स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन भी शिथिल पड़ा है। इससे जहां संविदा व आउट सोर्सिंग में कार्यरत करीब 12 हजार कर्मियों का कई माह का मानदेय अटका पड़ा है वहीं जननी सुरक्षा, मातृ वंदना समेत अन्य कई योजनाओं से जुड़े लाभार्थी भी प्रोत्साहन राशि न मिल पाने से परेशानहाल हैं।
इससे नाराज शासन के निर्देश पर अपर निदेशक ने जिले के जिम्मेदारों से एनएचएम संबंधी अभिलेख तलब कर बजट राशि खर्च न कर पाने के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। एनएचएम बजट का 28 करोड़ खर्च न हो पाने के कारण स्वास्थ्य विभाग में तैनात अफसरों की खूब किरकिरी हो रही है। अफसरों की लापरवाही के कारण ही दर्जन भर स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े करीब 9 हजार संविदा व 32 सौ आउटसोर्सिंग कर्मियों का मानदेय भी कई महीनों से अटका पड़ा है। अचरज की बात यह है कि जिम्मेदारी अधिकारी इसके लिए बजट न होने का रोना रोते हैं।
बजट राशि खर्च न हो पाने से जननी सुरक्षा व मातृ वंदना योजना समेत अन्य कई स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अपनी प्रोत्साहन राशि पाने के अस्पतालों का चक्कर काटने की परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके साथ ही बजट राशि को खर्च करने में बरती जा रही कंजूसी से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, नियमित टीकाकरण, पल्स पोलियो अभियान, किशोर स्वास्थ्य, अंधता निवारण तथा परिवार नियोजन कार्यक्रम समेत दर्जन भर योजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही अस्पतालों में सर्जरी व मेडिकल जांच के जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी फर्मों का भुगतान अटक जाने के कारण नहीं हो पा रही है। इससे महिला अस्पताल में कई महीनों से सर्जरी के लिए जरूरी सामानों का टोटा व्याप्त है।
सितंबर माह के पहले सप्ताह में 28 करोड़ का बजट बिना खर्च था। वर्तमान में संविदा कर्मियों व आशाओं के मानदेय के साथ ही सेवा प्रदाता एजेंसियों व फर्मों का भी बकाया राशि का भुगतान किया जा रहा है। कुछ भुगतान की फीडिंग अभिलेखों में न हो पाने के कारण ही पोर्टल पर डंप बजट अधिक दिखाई पड़ रहा था। -सुशील श्रीवास्तव, मंडलीय लेखा प्रबंधक
एनएचएम के तहत बजट डंप होने की जानकारी मिलने पर संबंधित से पत्रावली तलब कर जवाब मांग गया है। कर्मियों का बकाया मानदेय भुगतान करने व लाभार्थियों का प्रोत्साहन राशि उनके खाते में भुगतान कराने का निर्देश भी दिया गया है।
-डॉ. अनिल मिश्र, अपर निदेशक स्वास्थ्य देवीपाटन मंडल गोंडा।