कार्यालय में संचारी रोग नियंत्रण अभियान की समीक्षा करतीं सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा। -संवाद
गोंडा। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरजनित रोगों को खत्म करने के लिए गत दो वर्षों में ढाई करोड़ रुपये खर्च कर डाले। मगर वेक्टर जनित बीमारी कम होने के बजाय दस गुना तक बढ़ गई। वर्ष 2020 जिले में डेंगू के 17 केस मिले थे, जबकि वर्ष 2022 में डेंगू पीड़ितों की संख्या बढ़कर 188 पहुंच गई। मलेरिया संक्रमितों की संख्या भी दो से बढ़कर 13 हो गई। दो साल पहले एईएस के 25 केस थे, जो 51 पहुंच गए हैं।
संचारी रोग नियंत्रण के लिए हर साल सवा करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। दो साल में करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस बार भी एक अप्रैल से स्वास्थ्य विभाग नौ अन्य विभागों के सहयोग से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चला रहा है। आशा, आंगनबाड़ी सहित आठ हजार कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को बीमारियों से बचाव के तरीके समझाएंगे। इतनी रकम खर्च करने व तमाम प्रयासों के बावजूद बीमारी की रफ्तार बढ़ना चिंताजनक है।
वेक्टर जनित बीमारियां दूर भगाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण पर ही हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्ष 2022-23 में आशा व एएनएम को प्रशिक्षण देने में दो लाख 18 हजार रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा 75 मेडिकल ऑफिसर व 56 स्टाफ नर्स को एईएस-जेई केस मैनेजमेंट का एक दिवसीय प्रशिक्षण कराया गया। जिसमें 1,47,400 रुपये खर्च किए गए। इसी प्रकार मच्छरजनित रोगों की मॉनीटरिंग व सुपरविजन के लिए आठ महीने तक एक वाहन को किराए पर लिया गया है। जिसका 33 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से दो लाख 64 हजार रुपये किराया खर्च किया जा रहा है। संचारी रोगों से संबधित प्रपत्र प्रिंटिंग, टेलीफोन व इंटरनेट के बिल के नाम पर हर महीने आठ हजार यानी साल का 96 हजार रुपये खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद शहरी क्षेत्रों में संचारी रोग नियंत्रण के नाम पर सिर्फ धुंआ उड़ाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक टीम पहुंची ही नहीं है।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण के लिए हर साल अभियान चलाया जाता है। दो सालों में डेेंगू के केस बढ़े हैं मगर कम समय में ही डेंगू पर नियंत्रण कर लिया गया था। इस साल अभी कोई मामला सामने नहीं आया है।