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गुमनामी के अंधेरे में महर्षि पतंजलि की की जन्मस्थली

लखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 19 Jun 2019 10:32 PM IST
वजीरगंज (गोंडा)। एक तरफ जहां 21 जून को पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है। वहीं जिन्होंने योग विद्या दी, उनकी जन्मस्थली आज भी गुमनामी के अंधेरे में है। जी हां महर्षि पतंजलि का जन्म स्थान स्थानीय क्षेत्र के कोंड़र गांव में है। कोणेंन कोण दर्शनेन रीयते क्षीयते पत्नजलि: यत्र स कोड़र इति अर्थात शिष्यों के कोने से झांकने पर जहां महर्षि पतंजलि अदृश्य हो गये थे, वह स्थान कोड़र है। भोजवृत्ति के श्लोक के अनुसार ‘योगेन चित्तस्य पदेन वाचाम, मल शरीरस्य च वैदकेन। योअपकरोत तं प्रवर मुनीनाम, पतंजलि प्रांजलिरानतोरिम।’ अर्थात जिसने योग शास्त्र के द्वारा चित्त के मल को दूर किया। पद शास्त्र (व्याकरण शास्त्र) के द्वारा शब्दों के दोष को दूर किया और वैद्यक शास्त्र के द्वारा शरीर के मल को दूर किया, उस पतंजलि को प्रणाम है। संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 177 देशों द्वारा योग को 21 जून 2015 को मान्यता देने के बाद हर वर्ष विश्व में योग दिवस मनाया जा रहा है ।
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महर्षि पतंजलि का जन्म क्षेत्र के कोंडर गांव में होने का साक्ष्य धर्मग्रंथों में मौजूद है। पाणिनि की अष्टाध्यायी महाभाष्य में पतंजलि को गोनर्दीय कहा गया है और गोंडा को संस्कृति में गोनर्द कहा गया है जो राघवेंद्र चरित सर्ग 1 के 50वें श्लोक में उल्लिखित है। जनश्रुति के अनुसार पतंजलि अपने शिष्यों को परदे से शिक्षा दे रहे थे। किसी ने उनको देखा नहीं था। एक शिष्य ने पर्दा हटाकर उन्हें देखना चाहा तो वे सर्पाकार में गायब हो गए। लोगों का मत है कि वे कोंड़र झील होते हुए विलुप्त हुए थे जिससे झील का आकार सर्पाकार है। योग विद्या जिसको अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिल चुकी है, फिर भी योग प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्म स्थली गुमनाम क्यों है, यह प्रश्न स्थानीय लोगों को कचोटता है। उनके जन्म स्थल पर शिलापट लगा एक चबूतरा, सम्मय माता मंदिर व राम जानकी मंदिर है, जो स्थानीय लोगों के सहयोग से बना है।

सवा दो बीघा जमीन मंदिर के नाम है उस पर भी अतिक्रमण है। पुजारी रमेश दास मंदिर की देख रेख व पूजा पाठ करते है तो गांव के युवाओं को योग शिक्षक रवि शंकर दूबे व विपिन सिंह योग भी सिखाते है। इन सबका मानना है कि योग से जहां लोग निरोग हो रहे हैं वहीं योग के व्यापारी करोड़ों का वारा न्यारा कर रहे है, जबकि इसके प्रणेता की जन्मस्थली का कोई पुरसाहाल नहीं है। श्री पतंजलि जन्म भूमि न्यास के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ. स्वामी भगवदाचार्य द्वारा बीते वर्षों में संयुक्त राष्ट्र संघ के महा सचिव, प्रधान मंत्री सहित केंद्र व राज्य सरकार के कई मंत्रियों को पत्र भी लिखे गए। गत वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी कैप्टेन प्रभांशु श्रीवास्तव के अलावा बीते वर्षों में कई माननीय भी यहां आए थे। गांव सहित क्षेत्र वासियों को जन्म स्थली के विकास के तमाम आश्वासन भी मिले थे। मगर विकास तो दूर दोबार किसी अधिकारी ने यहां का रुख तक नहीं किया।

आज निकाली जाएगी शोभा यात्रा
महर्षि पतंजलि की जन्म स्थली कोंड़र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह जानकारी देते हुए श्री पतंजलि जन्म भूमि न्यास के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ. स्वामी भगवदाचार्य ने बताया कि 20 जून की शाम शोभा यात्रा का कार्यक्रम होगा। 21 जून को प्रात: योग शिविर ,11.30 बजे पूर्वान्ह से श्री राम चरित मानस का पाठ, भजन,कीर्तन तथा प्रवचन का कार्यक्रम होगा। जिसमें तमाम माननीयों, साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया है। शाम 4 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन होगा।
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