गोंडा। देहात कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में सात साल की अबोध बालिका से दुष्कर्म के मामले में 30 साल तक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बुधवार को पीड़िता को न्याय मिला। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने घटना में दोषी तीन अभियुक्तों को 10-10 साल कारावास और 30-30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अनीता साहू ने बताया कि देहात कोतवाली क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने 29 सितंबर 1993 को पुलिस को तहरीर दी थी। इसमें कहा कि सुबह नौ बजे वह अपनी पत्नी के साथ घर के सामने खेत में मक्का तोड़ रहा था। तभी अशोक, छोटू व सुबास घर में घुस गए और अशोक ने उसकी सात साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया। बेटी के चिल्लाने पर जब वह पत्नी के साथ दौड़ा तो तीनों घर से निकलकर भाग गए। पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और पुख्ता साक्ष्य मिलने पर तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
ट्रायल के दौरान संदेह से परे साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषसिद्ध किया। बुधवार को इस मामले में निर्णय सुनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम नम्रता अग्रवाल ने अशोक, छोटू व सुबास को 10-10 साल सश्रम कारावास और 30-30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अदालत के आदेशानुसार अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर उसमें से आधी धनराशि पीड़िता को बतौर प्रतिकर दी जाएगी।