सेवराई विकास खंड भदौरा के प्राथमिक विद्यालय अमौरा में मौत के साए में रहकर नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। विद्यालय की चटकी व दरारयुक्त छतों से अभिभावकों व शिक्षकों में किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
शिक्षकों की मानें तो विकास खंड में कई विद्यालयों की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाना घातक साबित हो सकता है, लेकिन शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के कान में जू नहीं रेंग रही है। विद्यालय की छतों से आए दिन प्लास्टर टूट कर गिरना आम बात हो गई है।
छतों में दिख रही सरिया व चिटकी दीवारें कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। स्कूल में करीब 197 बच्चे पंजिकृत हैं, जिनकी शिक्षा दीक्षा के लिए कुल पांच शिक्षक है। ग्रामीणों की माने तो विद्यालय का भवन करीब 40 साल पुराना है, जिसकी छत जर्जर हो चुकी है। आये दिन छत का प्लास्टर गिरता रहता है।
प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य राकेश सिंह का कहना है कि जर्जर व जीर्ण-शीर्ण हो चुकी बिल्डिंग को लेकर कई बार बीईओ व बीएसए को पत्राचार कर स्थितियों से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इस संबंध बीएसए हेमंत राव ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। इस संबंध में संबंधित बीईओ को निर्देशित कर जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।