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साहित्यकार अदब से लेते हैं ‘फिराक’ का नाम

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गाजीपुर। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से मशहूर शायर रघुपति सहाय ‘फिराक गोरखपुरी’ की जयंती पर संगोष्ठी कर उन्हें याद किया गया। इस दौरान उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य क्षेत्र में ‘फिराक’ का नाम अदब से लिया जाता है। महासभा के जिलाध्यक्ष के चंदन नगर स्थित आवास पर माल्यार्पण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। संगोष्ठी में विचार रखते हुए महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि फिराक उर्दू साहित्य के विद्वान और मशहूर शायर ही नहीं बल्कि एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। स्नातक करने के बाद ही वह पीसीएस हो गए थे लेकिन गांधीजी का एक भाषण सुनने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। उनका नाम हिंदी-उर्दू साहित्यकारों के बीच बड़े ही अदब से लिया जाता है। उन्हें साहित्य अकादमी और पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया था। संगोष्ठी में मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, पियूष श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, कौशल श्रीवास्तव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, शैल श्रीवास्तव, मोहनलाल श्रीवास्तव, अमरनाथ श्रीवास्तव, विवेक श्रीवास्तव, गौरव श्रीवास्तव, अमर सिंह राठौर, कमल श्रीवास्तव, संदीप वर्मा आदि उपस्थित थे। संचालन अजय कुमार श्रीवास्तव ने किया।
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