शेखपुर गांव के पास सड़क की पटरियों से होकर गुजरता बंदरों का झुंड़। संवाद
भड़सर। क्षेत्र के कई गांवों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। हालत यह हो गई है कि घर की महिलाएं अब खुले आंगन या बरामदे में खाना बनाने के बजाए बंद कमरों में भोजन बनाने को मजबूर हैं। छत पर कपड़े सुखाने से भी परहेज किया जा रहा है, वजह बंदर छतों पर झुंड बनाकर उत्पात मचा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब रास्ते पर चलना भी मुश्किल हो गया है। बिरनो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीते एक सप्ताह के भीतर बंदरों के काटने के छह मामले आ चुके हैं। घायलों को गहरे जख्म हुए हैं, जिससे गांवों में भय का माहौल व्याप्त है। लोग बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे हैं। शेखपुर के राकेश बिंद, राहुल राजभर और अरसदपुर के बबलू प्रजापति ने आरोप लगाया कि शहर में चल रहे बंदर पकड़ो अभियान के चलते ग्रामीण इलाकों में बंदरों को छोड़ा जा रहा है, जिससे यहां उनकी संख्या अचानक बढ़ी है। वन क्षेत्राधिकारी महेश देव ने बताया कि शासन से निर्देश प्राप्त हुए है। संवाद