गाजीपुर जिले में इन दिनों सांप के डसने की घटनाएं बढ़ गई हैं। डॉक्टरों के मुताबिक सांप डसने के बाद समय से अस्पताल पहुंच जाएं तो जान बचाई जा सकती है। लेकिन, अधिकांश लोग झाड़फूंक के चक्कर में पड़ते हैं, जिससे लोगों की जान चली जाती है। सर्पदंश के मामलों में दो तिहाई से अधिक मौतें हार्टअटैक से हो जाती हैं। रोजाना किसी न किसी इलाके में सांप के डसने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सामान्यत: बारिश और सिंचाई के बाद बिलों में पानी भरने से सांप खेत से निकलकर छांव की ओर जाने का प्रयास करते हैं। इसलिए खेतों में काम करते समय या घरों में छिपे सांप लोगों को डस लेते हैं। ऐसे में घबराए लोग अस्पताल न जाकर झांड-फूंक कराने लगते हैं। इतनी देर में मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। जहर पूरे शरीर में फैल जाने के कारण जान चली जाती है।
पक्षी विज्ञानियों के मुताबिक सांप बहरा होने के कारण सुनते नहीं हैं। आंखों के सहारे हिलती-डुलती चीज को देखकर और धरती के कंपन के अनुमान पर आक्रमण करते हैं। सांप जब हमलावर दिखें तो भागने की बजाय उनके ऊपर कपड़ा या रूमाल फेंकना चाहिए, जिससे वह उसमें फंस जाएं। सर्पदंश पर घबराए नहीं, आराम से लेट जायें, कपड़े ढीले कर दें।
चूड़ी, कड़े, घड़ी अंगूठी जैसे आभूषण निकाल दें। छोटे बच्चे, वृद्ध और अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों में जहर का असर गंभीर हो सकता है, इनके उपचार में देरी न करें। घाव के साथ छेड़छाड़ न करें। दौड़ने भागने से जहर तेजी से शरीर में फैलता है। सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को मदिरा, नशे की कोई चीज और कैफीनेटेड ड्रिंक्स न दें। पीड़ित को जल्द अस्पताल ले जाएं।