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पहाड़ी नदियों का जोर पाकर गंगा फिर उफनाई

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गंगा के जलस्तर में बुधवार को एक बार फिर बढ़ोत्तरी होने से तटवर्ती लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी है। पिछले दो दिनों में पानी घटने से लोगों ने राहत महसूस की थी। उम्मीद जगी थी कि अब पानी नहीं बढ़ेगा और बाढ़ का खतरा टल गया। लेकिन बुधवार को सुबह से गंगा ने उम्मीदों को धराशायी करते हुए एक बार फिर से अपना रूप रौद्र कर लिया है। बुधवार को एक सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ने लोगों की माथे पर फिर से चिंता की लकीरें दिखने लगी है।
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गंगा के तटवर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं । इस समय चंबल और बेतवा नदी में पानी छोड़े जाने से यमुना सहित गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। पिछले दिनों भी गंगा के जलस्तर में एकाएक बढ़ोत्तरी पहाड़ी नदियों में बरसात का पानी छोड़े जाने के कारण ही हुआ। इसका असर जनपद के रेवतीपुर और सैदपुर क्षेत्र में पानी खेतों में घुस गया। ऐसे में रेवतीपुर क्षेत्र के आधा दर्जन गांव प्रभावित हुए।
एक बार फिर से पहाड़ी नदियों का पानी गंगा को और भयावह बना रहा है। फिलहाल, मां कामख्या धाम बाइपास, अठहठा का संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। इससे आस-पास के आधा दर्जन गांवों के बच्चों के स्कूल जाने के लिए सड़क पर पानी में घुसकर जा रहे हैं। लोगों को भी रेतवीपुर, सुहवल और गाजीपुर में बाजार करने या इलाज कराने जाने में बाढ़ का पानी बाधा बन रहा है।
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बुधवार को गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी के क्रम में सुबह आठ बजे 62.200 मीटर, 10 बजे 62.220 मीटर, 12 बजे 62.240 मीटर, 2 बजे 62.260 मीटर, 4 बजे 62.280 मीटर, 6 बजे 62.300 मीटर दर्ज किया गया। सुबह से शाम तक जलस्तर में एक समान एक सेमी प्रतिघंटा की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई।
गोमती निगल रही नुरूदीनपुर गांव की जमीन
खानपुर। सैदपुर ब्लाक के नुरूदीनपुर गांव में गोमती नदी अपने बाएं तरफ की कृषि और आबादी की जमीन लगातार निगलती जा रही है। कटान से बचाव के लिए गोमती नदी के किनारे कटान रोधी सुरक्षा व्यवस्था के लिए सरकार ने दो बार स्थलीय और एक बार जलीय सर्वे के साथ एक बार ड्रोन सर्वे भी कराया है। अधिकारियों ने दो बार बजट भी बनाया लेकिन धरातल पर अभी तक कोई कार्य नहीं हो पाया।
जिले के पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, वर्तमान एमएलसी विशाल सिंह चंचल और तत्कालीन पूर्वांचल विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष और वर्तमान आयुष राज्यमंत्री डा. दयाशंकर मिश्रा ने इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्राचार भी किया है। गोमती नदी जनपद में प्रवेश करने के बाद खरौना के पास गंगा में समाहित होने से पूर्व करीब 17 किमी की सफर में पांच तीव्र मोड़ से होकर गुजरतीं है।
नेवादा, तेतारपुर और गौरहट के बाद गोरखा व नुरूदीनपुर में गोमती नदी उत्तर दिशा में बढ़ते हुए सीधे पूरब की ओर निकल जाती है। नुरूदीनपुर और अमेहता पंप कैनाल के बीच घुमावदार गोमती के घाट हर साल कृषि योग्य भूमि और रिहायशी आबादी की ओर बढ़ रहीं है। जिससे कई परिवार किनारा छोड़ दूर जाकर बस गए है।
देवकली पंप नहर प्रखंड-प्रथम की टीम सर्वे के बाद इस बाढ़ सुरक्षा परियोजना पर 371.15 लाख का बजट बनाया था। जिसमें दूसरे सर्वे के बाद सिंचाई निर्माण मंडल वाराणसी के अधिकारियों ने बढ़ाकर 473.70 लाख कर दिया। इसमें जिओ टैगिंग के माध्यम से गोमती नदी के किनारों को उसके मुड़ने वाली स्थान नुरूदीनपुर गांव से लेकर अमेहता के पास पंप कैनाल तक कटान रोधी बनाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि जिले के सभी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने इस कटान रोधी योजना को लेकर उत्साह दिखाया लेकिन जनपद में गंगा के कटान रोधी योजना के आगे गोमती कटान की बातें गौड़ हो जातीं है। हर साल जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जल सिचाईं मंत्रालय को इस कटान की समस्या से अवगत कराया जाता है।
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