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Ghazipur News: क्यों नहीं जागरूक हम... बना दिया शहर को कूड़ाघर

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एनएच और अन्य मार्गों पर भी लगे हैं कूड़े के ढेर,
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सड़कों के किनारे कूड़ा जलाने से भी लोग होते हैं परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। एक ओर सरकार गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिए तमाम कवायद कर रही है और ओडीएफ प्लस टू के तहत पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं दूसरी ओर इसको लेकर लोग लापरवाह बने हुए हैं। गांवों में कूड़ा रखने के लिए जगह-जगह कूड़ेदान के अलावा अन्य उपाय किए गए हैं। इसके बावजूद कूड़ा- कचरा सड़कों के किनारे फेंक रहे हैं।
कई जगह तो एनच 31 के किनारे कूड़ा पड़ा हुआ है जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मुहम्मदाबाद के शहनिंदा बड़की बारी के पास कूड़े का अंबार लगा है। शहर में प्रवेश करने के बाद सुखदेवपुर चौराहे के पास और लंका मैदान के पास ही कूड़े के ढेर दिखने लगते हैं। आलम यह है कि सुखदेवपुर चौराहे के पास कूड़े का ढ़ेर में जब आग लगा दी जाती है तो पूरे इलाके के लोग परेशान हो जाते हैं। सांस लेने में परेशानी और दुर्गंध काफी कष्टकारी हो जाती है।
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जबकि शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखने के लिए सरकार का काफी जोर है। इसके तहत पैसा भी अलग-अलग योजनाओं पर लगाया जा रहा है। गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ प्लस टू में कई तरह की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। गांव की गलियों से लेकर सड़कों के किनारे जगह-जगह अस्थायी कूड़ेदान रखे गए हैं।
इसके अलावा स्थायी कूड़ेदानों का भी निर्माण कराया जा रहा है। इसके बावजूद लोग सफाई को लेकर उदासीन बने हुए हैं। लोग विशेषकर सड़क की पटरियों को ही कूड़ा स्थल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और जहां-तहां फेंक देते हैं। सड़कों के किनारे पसरा कूड़ा राहगीरों के लिए मुसीबत बनता है। कई बार तो वाहनों के आते-जाते समय हवा से उड़कर लोगों पर भी पड़ता है।
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हवा से खेतों तक पहुंचता है कचरा
सड़कों के किनारे पसरा कूड़ा व उसमें मौजूद प्लास्टिक कचरा हवा के साथ उड़कर आसपास के खेतों में भी पहुंचते हैं जिसके चलते किसानों को परेशान होना पड़ता है। बताया जाता है प्लास्टिक कचरा खेतों की उर्वरा को भी प्रभावित करती है।

प्रतिबंध के बावजूद हो रहा प्लास्टिक व थर्मोकोल सामग्रियों की बिक्री
सरकार की ओर से प्लास्टिक व थर्मोकोल सामग्रियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद इनकी बिक्री शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक धड़ल्ले से की जा रही है। यह जल्दी नष्ट नहीं होते हैं। हालांकि अब सरकार की ओर से गांवों में प्लास्टिक कचरा निस्तारण केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
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कई जगह तो सड़कों के किनारे जलाते हैं कूड़ा
शहर हो या ग्रामीण इलाका कई जगह सड़कों के किनारे रखे कूूड़े को लोग जलाते हैं। इसके चलते आसपास का वातावरण भी प्रभावित होता है। इसके अलावा कूड़ा जलने से निकलने वाला धुंआ भी लोगों को परेशान करते हैं।
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ओडीएफ की योजना के तहत चयनित गांवों मेंं कूड़ा घर और उठान की व्यवस्था की जा रही है। जिन जगहों पर कूड़ा का निस्तारण ठीक ढंग से नहीं हो रहा उसको ठीक कराएंगे।
अंशुल मौर्य, डीपीआरओ
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