करीब चार दशक से भाजपा और अंसारी परिवार से समर्थित प्रत्याशी के बीच रहा है मुख्य मुकाबला
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद। नगरपालिका परिषद मुहम्मदाबाद का चुनाव इस बार कई मामलों में ऐतिहासिक रहा है। पिछले चार दशक से मुहम्मदाबाद नगर में मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी और अंसारी परिवार से समर्थित प्रत्याशी के बीच रहा है, चाहे अंसारी परिवार जिस भी दल में रहा हो।
पिछले चुनाव में यहां बसपा के शमीम अहमद विजयी रहे, लेकिन इस बार बसपा ने यहां कोई प्रत्याशी नहीं दिया और सपा ने वर्ष 2012 व 2017 के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे रईस अहमद को ही अपना प्रत्याशी घोषित किया। जिसे अंसारी परिवार ने अपना प्रत्याशी बनाकर चुनाव लड़ाया और वे विजयी भी रहे।
इस बार प्रतिकूल परिस्थितियों में चुनाव अभियान का नेतृत्व अंसारी परिवार की नई पीढ़ी के युवा विधायक सुहैब अंसारी के कंधों पर रहा। उन्होंने रणनीति के तहत भाजपा को अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया। दोनों परंपरागत सीट मुहम्मदाबाद और बहादुरगंज पर अंसारी परिवार का कब्जा बरकरार रखा।
दूसरी तरफ यहां की भाजपा में दो फाड़ साफ थी। कलह और रणनीतिक कमजोरी होने से भाजपा प्रत्याशी को मुंह की खानी पड़ी। बावजूद इसके भाजपा प्रत्याशी संदीप गुप्ता ने पिछले चुनाव में भाजपा को मिले मत के करीब डेढ़ गुना मत प्राप्त किया। पिछले चुनाव में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को 5033 मत प्राप्त मिले जबकि इस बार भाजपा प्रत्याशी को 7311 मत मिले। जबकि भाजपा के बागी प्रत्याशी तेजबहादुर यादव को 1691 मत मिला है। इस चुनाव में भाजपा पूरी तरह से दो फाड़ नजर आई।
बागी प्रत्याशी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद भी भाजपा का एक खेमा उसके साथ था। साथ ही कमजोर हाथों में स्थानीय भाजपा की कमान होने से भाजपा एकजुटता की कमी दिख रही है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में हवा बनाने आए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी और अन्य नेताओं की हवा निकल गई।
भाजपा से सहानुभूति रखने वालों का मानना है कि अगर इस चुनाव में भाजपा कार्यकर्ता व नेता एकजुट होकर लड़े होते तो चुनाव परिणाम कुछ और होता। पार्टी नेताओं की बगावत को पार्टी हाईकमान ने काफी गंभीरता से लिया है। बागी प्रत्याशी के निष्कासन के बाद संघ के सभी पदाधिकारियों को हटा कर नये पदाधिकारी बना दिये गएहै।