शादियाबाद। स्थानीय कस्बा में बृहस्पतिवार की रात ''इस्लाहे मोआशरा कांफ्रेंस'' (समाज सुधार सम्मेलन) का आयोजन किया गया। इस मौके पर नेपाल से आए मौलाना मुफ्ती गुलाम जिलानी ने अपनी तकरीर में पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पैगंबर ने हमें पड़ोसियों का ध्यान रखने का संदेश दिया है, चाहे वह किसी भी धर्म के हों। उन्होंने भूखे पड़ोसी को खाना खिलाने और मुश्किल वक्त में उनका साथ देने की पुरजोर अपील की। मौलाना जिलानी ने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने, विवाह में फिजूलखर्ची रोकने और दहेज प्रथा पर अंकुश लगाने पर जोर दिया। उन्होंने आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की भी बात कही। इससे पहले जलसे की शुरुआत मौलाना बेलाल अज़हरी मिस्बाही ने तिलावते कलाम-ए-पाक (पवित्र कुरान की तिलावत) से की। अज़मत रज़ा भागलपुरी, आयान अख्तर, सकलेन वजाहत और तौफीक चिश्ती ने नात शरीफ (पैगंबर की प्रशंसा में कविता) पढ़कर खूब वाहवाही बटोरी। जलसे के अंत में देश में अमन-चैन और तरक्की के लिए विशेष दुआ कराई गई। जलसे का संचालन बेलाल रज़ा बरकाती ने किया। ऐनुल बशर मिस्बाही और अब्दुल मन्नान खान के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में शाहिद अहमद, उमेर अहमद, अज़मतुल्लाह मिस्बाही, अब्दुल वाजिद अत्तारी, मौलाना इनामुद्दीन, हाफिज मुंताज, आफ़ताब मदनी सहित कई स्थानीय लोगों का विशेष सहयोग रहा।