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रेवतीपुर और सैदपुर के गांवों में पहुंचा पानी, धीमी कटान भी

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जनपद में गंगा के उफान पर होने से तीसरे दिन रविवार को पानी रेवतीपुर और सैदपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में फैलना शुरू हो गया। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाके के लोग बाढ़ की त्रासदी को लेकर सहमे हुए हैं। खेती-किसानी के साथ जन-जीवन प्रभावित होने का डर लोगों के चेहरे पर झलकने लगा है। सबसे मुश्किल रेवतीपुर ब्लॉक के अठहठा गांव के लिए है। संपर्क मार्ग की एक पुलिया पिछले साल बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के बाद इस बार दूसरे संपर्क मार्ग पर भी पानी चढ़ गया। जिससे गांव का संपर्क कटने की स्थिति पैदा हो जाएगी। साथ ही पड़ोसी बीरउपुर, नसीरपुर गांव के हजारों लोगों को जन-जीवन प्रभावित हो सकता है। वहीं करंडा क्षेत्र के बड़हरिया गांव में कटान भी शुरू हो गई है।
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उफनाई गंगा की वजह से रविवार को मां कामख्या धाम बाईपास पर पानी कमर तक पहुंच जाने से अवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। ऐसे में गंगा पार के लोगों के सामने आवागमन की समस्या पैदा होने लगी है। सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 62.640 मीटर पर था। इस दौरान दो सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही थी। 10 बजे तक 62.680 मीटर और 12 बजे तक 62.70 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि, शाम चार बजे तक गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया। जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली है।
वहीं, दिन भर तेज हवा चलने से करंडा क्षेत्र के बड़हरिया गांव में बोल्डर पीचिंग के बगल में धीमी कटान होने से यहां सात बिस्वा जमीन गंगा में समा गई है। इस दौरान गंगा में उठती लहरों को देख इलाके के लोग सहमे हुए थे। करंडा संवाददाता के अनुसार, बड़हरिया में गंगा के किनारे बसे टुन्नु यादव, गोविन्द यादव , तेजनारायण, दयाशंकर यादव समेत अन्य लोगोंके घरों को बचाने के लिए हुए बोल्डर पीचिंग के बगल में कटान से लगभग सात बिस्वा भूमि गंगा में समा गई। लोगों की सूचना पर सिंचाई विभाग के अधिकारी पहुंच कर कटान वाले स्थानों पर ईंट भरी बोरी डलवाना प्रारंभ कर दिया।
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सेवराई संवाददाता के अनुसार, गंगा नदी का जलस्तर में बढ़ाव के कारण नसीरपुर, हसनपुर, बीरउपुर तथा परमानंदपुर में आबादी के पास पानी आ गया है। कामाख्या धाम मंदिर से रेवतीपुर जाने वाले मार्ग पर पुलिया के पास पानी सड़क के ऊपर बह रहा है। जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। लोगों को दूसरे संपर्क मार्गो से आवागमन करना पड़ रहा है। तहसीलदार अमित शेखर, राजस्व निरीक्षक राकेश कुमार राय समेत अन्य लोगों ने बाढ़ प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। राजस्व कर्मचारियों ने बताया कि अभी 11 ग्रामों के खेतों तक पानी आ गया है। अभी गांव की आबादी में पानी नहीं आया है। इससे नसीरपुर, हसनपुरा और वीरउपुर ग्राम के पास आबादी के नजदीक पानी आने के कारण गांव की आबादी को बाढ़ के तरफ जाने से मना किया गया। जबकि इन सभी ग्रामों में परवल, हरी सब्जी, केला की फसल के साथ मिर्च और टमाटर के बेहन प्रभावित होने से 58 हेक्टेयर खेती चपेट में आ चुकी है। ऐसे ही क्षेत्र में बड़ी परेशानी पशुचारा एवं पशुओं के रखरखाव की हो रही है।
बाढ़ राहत के लिए सभी राजस्व कर्मचारियों को निर्देशित किया जा चुका है। लोगों को बचाव और राहत कार्य के लिए बाढ़ चौकी एवं राहत शिविर का बंदोबस्त पूरा हो चुका है। नाविकों को लोगों के आवागमन के लिए अपनी नाव उपलब्ध कराने को निर्देशित किया गया है।
-राजेश प्रसाद चौरसिया, एसडीएम सेवराई
सैदपुर और जमानिया के अधिकारियों ने किया दौरा
मौधा/जमानियां। लगातार बढ़ रहे गंगा के जलस्तर को देखते हुए तहसील प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट पर है। जमानिया तहसील क्षेत्र में गंगा नदी से कुल बाढ़ से 85 गांव के करीब 70 हजार 653 परिवार प्रभावित होते है। यहां कुल 41 चौकी बनाई गई है। सभी को सक्रिय कर दिया गया है तथा लगातार बाढ़ चौकियों का निरीक्षण कर जानकारी ली जा रही है।
एसडीएम और तहसीलदार ने बाढ़ चौकियों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही गंगा तट का जायजा लिया। तहसीलदार लालजी विश्वकर्मा ने बताया कि बाढ़ कि संभावना को देखते हुए 40 नावों एवं नाविकों कि व्यवस्था भी कर ली गई है। इस बार 25 आपदा मित्रों भी बनाए गए है और छह तैराकों को भी चयनित कर लिया गया है। इसके साथ ही तहसील में बनाया गया कंट्रोल रूम पूरी तरह से सक्रिय है। मौधा संवाददाता के अनुसार, सैदपुर नगर के अधिकांश घाट जहां लगभग पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। वहीं पटना, हथौड़ा, शादी भादी, कुसहीं, हथौड़ी व खरौना आदि गांवों को गंगा ने घेरना शुरू कर दिया है। रविवार को सैदपुर तहसीलदार नीलम उपाध्याय ने बाढ़ से प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि 14 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है। बाढ़ के संबद्ध में लापरवाह बरतने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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