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कृषि भूमि में जलजमाव, डीएम को सौंपा पत्रक

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करंडा। क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांव की कृषि भूमि बाढ़ के पानी के जल जमाव से झील में तब्दील हो गई है। इससे किसान काफी चिंतित हैं। मंगलवार को स्वाभिमान संगठन के अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने डीएम एमपी सिंह से मिलकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही वक्ताओं ने उन्हें बताया कि धरम्मपुर, कटरिया, कोटिया एवं अटरिया विशुनपुरा के किसानों की लगभग 800 बीघा भूमि पर आठ फीट तक बाढ़ का पानी जमा हुआ है। इन गांवों के अलावा करंडा क्षेत्र के ही मैनपुर, मानिकपुर, लखनचंदपुर, ब्राहमणपुरा, सरैया और करंडा की भी लगभग 700 बीघा कृषि भूमि बाढ़ के पानी के जलजमाव के कारण झील बनी हुई है। अगर इन खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था नहीं की गई तो रबी की बोआई नहीं हो पाएगी और हजारों परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। बाढ़ आने के बाद इन गांवों की खरीफ की खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। वैसे इन गांवों के लोग खरीफ की सीजन में दलहनी और सब्जी की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। फसल डूबने के बाद पहले से ही कर्ज में डूबे किसानों को अब रबी की बुआई न हो पाने की चिंता सताये जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर रबी की बुआई नहीं हो पाएगी तो कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। संगठन के लोगों ने जिलाधिकारी को बताया कि वर्ष 2019 में भी बाढ़ के पानी का जल जमाव था। उस समय प्रशासन ने पंप लगाकर कटरियां धरम्मरपुर के किसानों के खेतों से पानी निकलवाया था। स्वाभिमान संगठन के लोगों ने किसानों से कहा कि हजारों किसानों परिवारों के हितों को देखते हुए उक्त जल जमाव वाले क्षेत्रों से पानी को निकालने की व्यवस्था की जाए, जिससे अन्नदाता किसान अपने परिवार का पालन करते हुए राष्ट्र के लिए अन्न उत्पादन कर सकें। इस मौके पर संगठन के अरूणेश पांडेय, नीलेश दूबे, अंजुमन यादव, उपेन्द्र सिंह, पीयूष सिंह, पुनीत सिंह, विनीत सिंह, विनीत दूबे, मारूती राय, रत्नेश सिंह, बापू सिंह आदि उपस्थित रहे।
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