गाजीपुर। गंगा पर बने सेतु का नामकरण तो परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के नाम पर कर दिया गया, लेकिन डेढ़ दशक से स्ट्रीट लाइटें नहीं जल रहीं सकीं। स्थिति यह है कि सेतु की स्ट्रीट लाइटों के खराब होने और अंधेरा होने के चलते रात के समय दो वर्षों में छह से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रतिदिन एक हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता है।
वीर अब्दुल हमीद सेतु की स्ट्रीट लाइट रात में जलें, इसके लिए छात्र नेताओं और क्षेत्रीय लोगों ने कई बार आंदोलन किया गया, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में चला गया। जबकि ठंड के मौसम में कोहरे के चलते आमने-सामने वाहनों के टकराने की आशंका बढ़ जाती है। पुल पर न तो संकेतक लगा है और न ही कोई पट्टी ही लगाई गई है। यहीं नहीं पुल सड़क के दोनों तरफ बालू और मिट्टी जमा होने से अक्सर ही वाहनों के फिसलकर गिरने का सिलसिला बना रहता है। यह पुल बिहार व जनपद के जमानिया और सेवराई को ही नहीं विभिन्न प्रांतों एवं जनपदों को भी जोड़ता है। वर्ष 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के कार्यकाल में इसकी आधारशिला रखी थी। करीब दस वर्ष बाद 1984-85 में यह सेतु बनकर तैयार हुआ था। 1100 मीटर लंबे इस सेतु पर डेढ़ दशक से प्रकाश की व्यवस्था नहीं हो सकी, जबकि 64 स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, जो शोपीस बनकर रह गई हैं।
मामला संज्ञान में है। मार्च तक वीर अब्दुल हमीद सेतु की खराब स्ट्रीट लाइटों को बदल दिया जाएगा। - आरएस यादव परियोजना निदेशक एनएचआई वाराणसी