जिला अस्पताल के ओपीडी और आपातकक्ष के बाहर बेतरतीब तरीके से खड़े हो रहे वाहनों के चलते मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दुर्घटना में घायल एवं गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को लेकर पहुंचने वाले एंबुलेंस को आपातकक्ष तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत उठानी पड़ती है। यहीं नहीं परिसर में ठेला और खोमचा के अलावा खानपान की दुकानों के चलते भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से में वाहन खड़ा करने के लिए पार्किंग की व्यवस्था करने की कवायद शुरू कर दी गई है, जिससे समस्या से निजात मिल सके।
गोराबाजार स्थित 200 बेड के अस्पताल को चिकित्सकीय व्यवस्थाओं से सुदृढ़ तो किया जा रहा है, लेकिन ओपीडी कक्ष और आपातकक्ष के बाहर के अलावा परिसर में वाहनों को खड़ा करने के लिए पार्किंग की व्यवस्था नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि मुख्य गेट से लेकर इधर-उधर परिसर में वाहन खड़े किए जा रहे हैं। परिसर की सड़क पर ही बाइक और प्राईवेट वाहन खड़े रहने से मार्ग सकरा हो जाता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मुख्यगेट के पास जाम की स्थिति पैदा हो जाने से एंबुलेंस को आपातकक्ष के मुख्य द्वार तक पहुंचने में समय लग जाता है। यहीं नहीं अस्पताल परिसर में दूसरे तरफ सरकारी एंबुलेंसों को भी बेतरतीब तरीके से खड़ा कर दिया जाता है। अस्पताल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था न होने और बेतरतीब तरीके से वाहनों के खड़ा होने को देख करीब 15 दिन पूर्व जिलाधिकारी एमपी सिंह ने राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य से पार्किंग व्यवस्था कराने और ओपीडी एवं आपातकक्ष के सामने से वाहनों को हटवाने का निर्देश दिया था। ऐसे में कालेज प्रशासन की ओर से अब अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था करने की कवायद शुरू कर दी गई है, जिससे समस्या से निजात मिल सके। इस संबंध में मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि अस्पताल के पिछले हिस्से में पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसको लेकर कार्य शुरू करा दिया गया है।
आज से संचालित हो जाएगा मर्चरी हाउस
गाजीुर। गोराबाजार स्थित जिला अस्पताल में स्थापित मर्चरी हाउस बुधवार से संचालित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि छह फ्रीजर युक्त नए मर्चरी हाउस का संचालन अब शुरू हो जाएगा। इसमें आसानी से 12 शवों को रखा जा सकेगा। मालूम हो कि अभी भी पुराने अस्पताल परिसर में बने मर्चरी हाउस में ही शवों को रखा जा रहा था। वहां पर्याप्त फ्रीजर की व्यवस्था न होने से दुर्गंध एवं गंदगी से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।