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Ghazipur News: गुरु तेग बहादुर की शहादत को किया नमन

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गाजीपुर। सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस को सिख समुदाय ने श्रद्धापूर्वक मनाया। सोमवार को इस मौके पर नगर के महाजन टोली स्थित गुरुद्वारे में सुबह गुरुग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेक श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। अरदास व प्रसाद वितरण के बाद गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया गया।
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इस अवसर पर सरदार दर्शन सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने जनेऊ, तिलक एवं हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। इन्हें धर्म की चादर हिंदू का रक्षक कहा जाता है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर स्थानीय सिख समुदाय के लोगों ने घरों पर गुरुवाणी का पाठ कर उनकी शहादत को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
दशमेश सेवा समिति मुहम्मदाबाद के वरिष्ठ सदस्य सरदार नरजीत सिंह ने कहा कि आज ही के दिन औरंगजेब ने दिल्ली के लाल किले के सामने चांदनी चौक पर गुरु तेग बहादुर का सिर कलम करवा दिया था। मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हें जान के बदले अपना धर्म बदल कर इस्लाम कबूल करने के लिए कहा था। उन्होंने हंसते-हंसते जान देना चुना था। यह औरंगजेब को बिल्कुल पसंद नहीं था कि कोई उसके हुक्म को ना मानें, उसने 24 नवंबर 1675 में दिल्ली के लाल किले के सामने चांदनी चौक पर गुरु तेग बहादुर का सिर कलम करवा दिया था। तब से आज के दिन को हर साल गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है और उनकी शहादत को याद किया जाता है।
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वैसे इस वर्ष सिख समुदाय के लोगों की मांग पर 24 नवंबर के बजाए 28 नवंबर को सरकार ने गुरु तेग बहादुर की शहादत दिवस पर अवकाश घोषित किया है जिसके चलते आज शहीदी दिवस मनाया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर धैर्य, वैराग्य और त्याग की मूर्ति थे। उन्होंने ने 20 सालों तक साधना की थी। गुरु नानक के सिद्धातों का प्रचार करने के लिए उन्होंने कश्मीर और असम की लंबी यात्रा की।
उन्होंने अंधविश्वासों की आलोचना कर समाज में नए आदर्श स्थापित किए। आस्था, विश्वास और अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। ऐसा भी माना जाता है कि उनकी शहादत दुनिया में मानव अधिकारों के लिए पहली शहादत थी, इसलिए उन्हें सम्मान के साथ ‘हिंद की चादर’ कहा जाता है। गुरु तेग बहादुर को शहीदी दिवस पर नमन करने वालों में हरजीत सिंह बिल्लू, चरनजीत सिंह बग्गा, कवलजीत कौर, हीरा यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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