कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने को लेकर एक तरफ जहां सरकार ऑक्सीजन से लेकर दवाओं तक के इंतजाम में जुटी हुई है। वहीं बड़े पैमाने पर हुए तबादले के विरोध में लिपिकों के कार्य बहिष्कार आंदोलन से स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जेम पोर्टल पर खरीद-फरोख्त का जहां ठप है। वहीं जननी सुरक्षा का भुगतान भी रुका हुआ है। इससे संचालित योजनाएं भी प्रभावित होती दिख रही हैं। कोरोना महामारी की तीसरी लहर से निपटने के लिए दवाओं के अलावा अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं से संबंधित खरीद-फरोख्त जेम पोर्टल के जरिये होती है। हालांकि खरीद की प्रक्रिया लिपिकों के सहयोग से होनी है। ऐसे में इनके कार्य बहिष्कार करने से तैयारियां पूरी तरह से अधर में लटक गई हैं। इसके अलावा कार्यालय बंद रहने से चिकित्सा प्रमाण-पत्र, स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र, मेडिकोलीगल प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए लोग इधर-उधर भटकने को विवश हैं। देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग के 30 से 40 लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों एवं आठ से दस चिकित्सकों का तबादला गैर जनपदों के लिए कर दिया गया है। इसमें कई डॉक्टरों का स्थानांतरण उनके विशेष अनुरोध पर हुआ है। जबकि लिपिक संवर्ग कर्मचारियों का तबादला होने से स्वास्थ्य विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्य बाधित होते दिख रहे हैं।