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जीवन में सफल होने के लिए अंकों की गणित ही नहीं रखती मायने

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संघर्ष से बड़ी सफलता पाई जा सकती है, इसमें कोई शक नहीं। जीवन में सफल होने के लिए अंकों की गणित ही मायने नहीं रखती बल्कि हमारा माद्दा और जज्बा तथा लक्ष्य के प्रति लगन का इसमें विशेष योगदान है। कई ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें परीक्षा में अच्छे अंक नहीं मिले और छोटी सेवा में समायोजित हुए लेकिन उसके बाद परिश्रम के बल पर उन्होंने कामयाबी दर्ज की। जमानिया के हिंदू पीजी कालेज के छात्र रहे स्टेशन बाजार निवासी अंकित कुमार सीएजी में ट्रांसलेटर हैं। इंटरमीडिएट में कम अंक पाने पर वह दुखी रहते थे। मोटीवेशन मिला तो अच्छे अंक तो स्नातक में लाए ही सफलतापूर्वक अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। सुबोध कुमार जायसवाल बीए द्वितीय वर्ष पास कर आईटीबीपी में सिपाही पद पर भर्ती हो गए। इसके बाद पढ़ाई जारी रखी और कम अंक के वावजूद विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण कर वह असिस्टेंट कमांडेंट पद पर सुशोभित हैं। हिंदू इंटर कॉलेज के छात्र अंबरीष सिंह ने इंटर में तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने के बाद अपने परिश्रम से नवोदय विद्यालय केरल में शिक्षक बनकर आगे बढ़ने की तैयारी जारी रखी। उत्तर प्रदेश पीसीएस के माध्यम से कामर्शियल टैक्स ऑफिसर बनने के बाद आज असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में सेवारत हैं। इस संबंध में हिंदू पीजी कालेज के समाजशास्त्र विभाग के डा. रविंद्र कुमार मिश्र एवं हिंदी विभाग के डा. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री ने बताया कि उत्तम मनोबल और सकारात्मक हौसले के साथ लक्ष्य के प्रति समर्पण और कठिन परिश्रम से इन शिक्षार्थियों ने जो इबारत गढ़ी है उसमें अंकों की बड़ी भूमिका नहीं थी भूमिका थी तो बस लगन एवं लक्ष्य बोध की। अभिभावक बच्चों के कम अंक पाने पर निराश न हों बल्कि उनका हौसला बढ़ाएं ताकि आगे वह और बेहतर कर सकें।
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