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Ghazipur News: तीन क्रांतिकारियों को काला पानी, सरजू पांडेय को सबसे अधिक 42 साल की हुई थी सजा

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गाजीपुर। जंग-ए-आजादी के लिए 1942 में हुई अगस्त क्रांति के दौरान गाजीपुर के सैकड़ों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को जेल और बेंत से मारने की सजा सुनाई गई थी। इनमें तीन क्रांतिकारियों सैदपुर बभनौली के बाल स्वरूप शर्मा, गधाईपुर गहमर के उमाशंकर उपाध्याय और बरहपार भीमापार के राजनाथ सिंह को काला पानी और सेनानी सरजू पांडेय को सबसे अधिक 42 वर्ष और 10 बेंत की सजा सुनाई गई थी। इन्हें दो मामलों में आजीवन कारावास की भी सजा सुनाई गई थी। इस लड़ाई में 12 महिलाओं ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया और जेल गईं। वहीं 1942 के आंदोलन में मोहम्मदाबाद के आठ लोग भी शहीद हो गए थे। आंदोलन का नेतृत्व शहीद शिवपूजन राय कर रहे थे। फायरिंग में आठ लोगों की जान चली गई। देश आजाद हुआ तो सजा काट रहे सभी सेनानी रिहा हो गए।
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सूचना विभाग उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों के संक्षिप्त परिचय नाम से प्रकाशित सूची में गाजीपुर के 647 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम का उल्लेख किया है। इस सूची में प्रत्येक स्वतंत्रता सेनानी को कितने वर्ष की जेल और कितने बेंत की सजा भुगतनी पड़ी, उसका भी उल्लेख है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरजू पांडेय को सबसे अधिक 42 वर्ष और 10 बेंत की सजा हुई थी। इन्हें दो मामलों में उम्रकैद भी हुई थी। दरौली के सूत्ता को 15 वर्ष दो माह तथा कैथवलिया सैदपुर के महेश सिंह को 15 वर्ष की सजा काटनी पड़ी। छह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को 10-10 वर्ष की जेल की सजा हुई थी। इनमें गाजीपुर नगर के हनुमान प्रसाद, सराय सदकर के भगवती चौबे, दिलदारनगर के इस्माइल, नगसर के कॉलदेव राय और गहमर के कुंवर कुमार सिंह एवं तिलेश्वर सिंह शामिल हैं। दिलदारनगर के कपूरचंद और सरजू को आठ वर्ष की जेल की सजा हुई थी। इसके अलावा सात वर्ष की सजा पाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की संख्या 39 और छह वर्ष की सजा पाने वाले सेनानियों की संख्या 20 है।
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सबसे अधिक 122 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ऐसे रहे हैं जिन्हें पांच वर्ष या इससे अधिक की जेल की सजा हुई थी। इनमें सादात क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में डोरिया गांव के रघुनाथ यादव को पांच वर्ष की जेल और 15 बेंत की सजा हुई थी। जबकि हुरमुजपुर के जीतन पांडेय, जीउत कोइरी, नेतीराय, नेउर, बरतू को पांच वर्ष की जेल, बाबूनंदन, रामपति सिंह, सुभाष राय, नन्हकू को सात वर्ष की जेल काटनी पड़ थी। परसनी के हर प्रसाद सिंह को 51 माह की जेल और दो सौ रुपये का जुर्माना हुआ था। गाजीपुर नगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पब्बर राम को नजरबंद किया गया था। सबसे कम एक माह की सजा पाने वाले स्वतंत्रता सेनानी बैरमपुर के दशरथ और गरई कार्तिकचंद्र रहे हैं। आजादी की लड़ाई में मुसलमान क्रांतिकारियों का भी योगदान रहा है।
2 से 4 वर्ष तक की सजा हुई थी महिला क्रांतिकारियों को
जेल जाने वाली महिला क्रांतिकारियों में विद्यावती देवी सैदपुर, सुशीला देवी रेवतीपुर धनराजी देवी, गाजीपुर की लक्ष्मी देवी नवावगंज,चंपा देवी, महराजी देवी, यशोदा देवी, राम दुलारी देवी, पान फूल देवी, सुभागी देवी, शामिल हैं। इन्हें दो से चार वर्ष की जेल की सजा हुई थी।
नौ मुस्लिम सेनानी भी गए थे जेल
स्वतंत्रता संग्राम की जो सूची जारी की गई है, उसमें जेल की सजा पाने वाले नौ मुस्लिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के भी नाम दर्ज हैं। इनमें नोनहरा के आलम खान, अली बरबरन, लहुआर के अली जान, नवपुरा के अली रजामा, जमानिया के अहमद, गहमर के आलम मीर खान, दिलदारनगर के इस्माइल, बैरमपुर शादियाबाद के वली मोहम्मद और कठिया गाजीपुर के वाजी अली का नाम शामिल है।
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