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महीने में खर्च हजारों फिर भी लोग बने हुए बेचारे

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सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्चकर बनाए गए सामुदायिक शौचालय का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जबकि इसके लिए ग्राम पंचायत के तहत समूह का गठन कर उसके देखरेख के नाम पर प्रतिमाह करीब 9000 खर्च किए जाते हैं, जिसमें 6000 समूह की महिला को देखरेख के लिए मानदेय के तौर पर दिया जाता है। वहीं 3000 संसाधनों पर खर्च किए जाते हैं। प्रतिमाह हजारों रुपये खर्च के बावजूद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है।
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शासन द्वारा लाखों रुपए ख़र्च करके सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य कराया गया था। तब तत्कालीन प्रधान द्वारा पास में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप में ही सबमर्सेबुल लगाकर किसी तरह शौचालय चालू करा दिया गया, लेकिन शौचालय उपयोग होने से पूर्व ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। अब पिछले चार महीनों से शौचालय जाम होने से उसमें तालाबंदी की गई है। लोगों ने अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की मांग की है। चेताया कि अगर ससमय सामुदायिक शौचालय नहीं चालू किया गया तो हम धरना प्रदर्शन को बाध्य होंगे।
खुले में शौच को विवश हैं ग्रामीण
सेवराई। ग्रामीण राधेश्याम चौधरी, सुनील गिरी, रामशंकर चौधरी, रामाशीष कुशवाहा, स्वामीनाथ कुशवाहा, उत्तम कुशवाहा आदि ने बताया कि पिछले चार महीनों से शौचालय का ताला तक नहीं खुला है। इससे ग्रामीणों को रोजाना शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। जबकि संबंधित समूह के द्वारा शौचालय की देखरेख एवं मानदेय के नाम पर प्रतिमाह 9000 की धनराशि उतार ली जाती है जब इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई तो जांच के नाम पर खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया गया।
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शौचालय जाम हो जाने के कारण मरम्मत कार्य कराया गया है। पानी की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है, जिसके लिए फिर से हैंडपंप रिबोर कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही शौचालय का मरम्मत कराते हुए इसको जनता को सुपुर्द किया जाएगा।- धर्मेंद्र, ग्राम प्रधान
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