यहां तक का सफर आसान नहीं था... तमाम परेशानियों ने राह रोकी, असफलताओं ने मनोबल तोड़ा तो कभी हालात ने हौसले भी डिगाए। लेकिन सपनों की मंजिल तक के सफर को कोई रोक न पाया। ये कहानियां सिर्फ जीत की नहीं है बल्कि उसके पीछे की मेहनत और जुनून की ज्यादा है। किसी को दूसरी बार में सफलता मिली तो किसी ने बचपन से ही अभाव झेला। लेकिन इस सभी में अगर कुछ समानता थी तो वो हार माने बगैर लक्ष्य पाने की थी। अपनों ने जोश भरा, कभी हताश हुए तो प्यार का ईंधन डाला, हर हाल में हौसला बढ़ाते रहे। ऐसे में फिर क्या था सभी लड़े...लड़खड़ाए पर मंजिल पर पहुंचकर ही रूके। अजी ! यों ही थोड़े ना कहते हैं, लड़ने वालों की कभी हार नहीं होती...
अपनों ने बढ़ाया हौसला, दूसरे प्रयास में हासिल हुआ मुकाम
स्निग्धा प्रधान
16वीं रैंक
मुहम्मदाबाद। सुखपुरा गांव की स्निग्धा प्रधान ने पीसीएस जे परीक्षा में 16वां स्थान पाकर जिले का नाम रोशन किया है। इसके पहले पीसीएस जे की परीक्षा 2018 में व बिहार पीसीएस जे की परीक्षा में भी परीक्षा में बैठी थी, जिसमें सफलता नहीं मिली। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानीं। वे कहतीं हैं कि माता-पिता ने हमेशा हौसला बढ़ाया कि तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी। मैं शुरू से ही पीसीएस जे का लक्ष्य लेकर चल रही थी। इसके लिए 12 से 14 घंटे तक पढ़ाई करती थी। सुखपुरा निवासी ग्रामीण बैंक से अवकाश प्राप्त मैनेजर ओम नारायण प्रधान की छोटी पुत्री स्निग्धा प्रधान गाजीपुर के सेंट जान्स स्कूल से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की हैं। इसके पश्चात दिल्ली के प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से एलएलबी और नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एलएलएम की। वह अपने इस सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देती हैं।
असफलता से नहीं मानी हार, दूसरे प्रयास में पाया मुकाम
अंजू यादव
116 वीं रैंक
दिलदारनगर। थाना क्षेत्र के फूली गांव निवासी अंजू यादव ने पीसीएस जे 2022 की परीक्षा में 116वां स्थान पाकर जिले का मान बढ़ाया है। वह लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल, राजाजीपुरम से हाईस्कूल वर्ष 2009 में किया और इसी विद्यालय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई 2011 में पूरी की। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम के अलावा पीएचडी की डिग्री हासिल की है, फिर जेआरएफ नेट भी किया है। पिछली बार पीसीएस जे की परीक्षा में साक्षात्कार में पहुंचने के बाद भी नाकाम हो गई थीं।
इनके पिता राम अवतार सिंह यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में निरीक्षक के पद पर बरेली जनपद में तैनात हैं। फोन पर हुए बातचीत में अंजू ने बताया कि मेरी मां गीता यादव ने पांच तक पढ़ाई की है, लेकिन अपने बच्चों को उच्च पदों पर देखना चाहती थीं। पिता समय निकालकर पढ़ाई को लेकर हमेशा प्रोत्साहित करते रहे, जिसके चलते मैंने यह सफलता हासिल की। मैं सुबह दस बजे से शाम 7 बजे तक लाइब्रेरी में रहकर 8 से नौ घंटे तक पढ़ाई करती थी। मेरा मानना है कि जिसके अंदर मेहनत और लगन हो तो सफलता जरूर मिलती है। अंजू दो बहन और दो भाइयों में दूसरे नंबर पर है। एक बहन इष्टा यादव एलएलएम कर रही हैं जबकि दो भाई संदीप और शिवा भी लखनऊ में पढ़ाई कर रहे हैं।
पापा थे वकील, बेटी ने पहले प्रयास में साकार किया सपना
करिश्मा यादव
172वीं रैंक
गाजीपुर। मेहरलीपुर उर्फ भंवरी गांव निवासी करिश्मा यादव ने 172वां स्थान पाकर जनपद का मान बढ़ाया है। उनके पिता स्वर्गीय कैलाश सिंह यादव दीवानी में अधिवक्ता थे। करिश्मा रक्षाबंधन पर प्रयागराज से घर आई तो परिवार के लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इकलौते भाई कृष्ण चंद्र यादव बताते हैं कि चार बहनों में तीसरे नंबर पर करिश्मा ने वर्ष 2010 में जीजीआईसी से 10वीं और लुदर्स कान्वेंट स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएएलएबी, की, फिर एलएम की पढ़ाई कर रहीं हैं। वह इस समय चतुर्थ समेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं। हॉस्टल में ही रहकर ही करिश्मा पिता के सपने को साकार करने का सपना संजोए थीं। हालांकि पिता की बीमारी के चलते वर्ष 2020 में मौत हो गई। वे चाहते थे कि उनकी पढ़ाई में अव्वल रहने वाही करिश्मा जज बने। जिसे अब करिश्मा ने अपनी कड़ी मेहनत से साकार करके दिखा दिया। करिश्मा करतीं हैं कि गांव में रहने वाली बेटियों का मनोबल बढ़ाए और उन्हें मौका दें तो वह जरूर बुलंदियों पर पहुंचकर दिखाएंगी।
बचपन में सिर से उठा पिता का साया, मां ने की परवरिश
अंशुमान विक्रम सिंह
222वां स्थान
मौधा। क्षेत्र के खानपुर गांव निवासी अंशुमान विक्रम सिंह ने पीसीएस-जे 2022 की परीक्षा में 222वां स्थान प्राप्त किया है। उनके सफलता की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। परिवार के लोग बताते हैं कि जब अंशुमान एक वर्ष के थे तभी उनके सिर से पिता धीरेंद्र कुमार सिंह का साया उठ गया था। मां इंदु सिंह ने अपने तीनों बच्चों की परवरिश तमाम कठिनाइयों का सामना करना हुए की। उन्होंने बड़े बेटे विशाल सिंह को आईआईटी कराया। वह इस समय अमेरिका में इंजीनियर है, जबकि दूसरा बेटे विवेक सिंह झांसी जनपद में जिला लेखा परीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। इसी तरह तीसरे बेटे अंशुमान विक्रम सिंह के भी पीछे भी उनका ही हाथ है। वह हमेशा अपने बच्चों का हौसला बढ़ाती रहती थीं और अपने दर्द को छुपाए रखती। अंशुमान विक्रम सिंह ने वाराणसी के सेंट जान स्कूल मढ़ौली से हाईस्कूल 2010 में और इंटरमीडिएट की परीक्षा 2012 में सनबीम एकेडमी सामने घाट वाराणसी से उत्तीर्ण किया है। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के डाक्टर राममनोहर लोहिया नेशनल ला यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई 2018 में पूरी की। अंशुमान विक्रम सिंह ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि इसके पहले वर्ष 2018 में वह पीसीएस-जे की परीक्षा में शामिल हुए थे। लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्तमान में मिली सफलता को उन्होंने मां के आशीर्वाद और मित्रों व परिजनों से मिली प्रेरणा का प्रतिफल बताया।