भीमापार। शारदा सहायक नहर के खंड 23 लालगंज रजबाहा में पानी नहीं आने से किसानों की धान की फसल सूख रही है। जुलाई महीने से लेकर अबतक नहर का पानी नहीं पहुंचा है। बारिश होने से किसानों को थोड़ी राहत है।
आजमगढ़ जिले के ठेकमा के बरदह से निकली 71 किलोमीटर लंबी नहर के पानी से क्षेत्र के खेतों में पानी पहुंचता था। वर्ष 1960 से 1970 में तत्कालीन विधायक राजनाथ सिंह के प्रयास से नहर बनाई गई थी। इस समय आजमगढ़ जिले के आखिरी गांव रामपुर तक तो नहर से पानी पहुंच रहा है, लेकिन जनपद की सीमा में प्रवेश करते ही नहर सूखी है। 15 जुलाई को आखिरी बार सफाई कराई गई थी लेकिन इसके बाद से ही नहर में पानी आना बंद हो गया। इससे जिले में करीब 15 से 20 किमी तक के दायरे में नहर से जुड़े हजारों बीघा खेत सूखे पड़े हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के लापरवाह रवैया से किसान परेशान हैं। आर्थिक रूप से संपन्न किसान तो डीजल इंजन के सहारे सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन गरीब किसानों की फसल पानी के अभाव में बर्बाद हो रही है। इस समय धान की फसल पूरी तरह से बारिश के पानी पर निर्भर है। इस समस्या से किसानों ने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को अवगत कराया। बताया गया कि पूरी क्षमता से नहर में पानी नहीं छोड़े जाने से ये समस्या आ रही है। नहरों में जंगली पौधे व झाड़ियां उगी हैं। जबकि हर साल इसकी सफाई के नाम पर लाखों रुपये का बजट पास किया जाता है। अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रति किमी नहर की सफाई से 50 हजार रुपये से कराई गई है।
नहर में 350 क्यूसेक पानी की मांग की जा रही है, लेकिन नहर को 150 क्यूसेक पानी ही मिल रहा है। पानी की मात्रा बढ़ाई जायेगी, तभी टेल तक पानी पहुंच पायेगा।- विरेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, शारदा सहायक
नहर से जुड़े हैं दर्जनों गांव
आजमगढ़ जिले के ठेकमा के बरदह से निकली इस नहर से क्षेत्र के बरेहता, खिदिरपुर, मलौरा, कुआंटी , कबुलहा, नाथूपुर, मंगारी, दलीपरायपट्टी, महुरसा, बिजरवां, मखदुमपुर, जगदीशपुर, गौरा सहित दर्जनों गांव को जोड़ा गया।