ताजपुर हाल्ट के ओवब्रिज पुल पर बैठी बकरियां। संवाद
दुबिहां। वाराणसी छपरा रेल खंड पर ताजपुर डेहमा रेलवे स्टेशन को हाल्ट रेलवे स्टेशन में परिवर्तित करने के बाद से यात्री सुविधाओं का टोटा हो गया है। ब्रिटिश काल में बने रेलवे स्टेशन जब हाल्ट स्टेशन में परिवर्तित हुआ तो इस स्टेशन से जिम्मेदारों का ध्यान हट गया है। इससे परिसर में बैठने के लिए बेंच, पीने का पानी, शौचालय, रोशनी और सफाई की व्यवस्था नहीं है। वहीं, फुट ओवरब्रिज पर आवारा पशुओं तथा अराजकतत्वों का जमावड़ा रहने से यात्री उसपर जाने से डरते हैं।हाल्ट स्टेशन पर ट्रेन से यात्रा करने के लिए क्षेत्र के पतार भरौली, ताजपुर, गोसलपुर, डेहमा, ऊतराँव, बीबीपुर,गोबिंदपुर, गडार, कुसहा, करकटपुर, जमालचक, गोपालचक, मिश्रपुरा, महेंद,पहदरीया, बेनीपुर, नसीराबाद सहित अन्य गांव के लोग आते हैं। यहां से सवारी गाड़ियों का रोज आना-जाना तो है लेकिन शाम को जो सवारी गाड़ी आती है तो स्टेशन परिसर में अंधेरा रहता है। हाल्ट स्टेशन होने के नाते एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं है। वहीं, टिकट बिक्री का काम ठेके पर होने लगा है। कोई रेलवे का कर्मचारी मौजूद नही रहता है। परिसर में बना शौचालय उपयोग करने लायक नहीं है। स्टेशन परिसर में तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं। इनमें दो खराब हैं। विद्युत कनेक्शन है, लेकिन खंभों पर बल्ब नहीं होने से अंधेरा रहता है। स्टेशन परिसर में घास उग आई है। बेंच टूटी हैं। गोसलपुर गांव निवासी राजेश सिंह राजू ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत में रेलवे स्टेशन बना था जिसको हाल्ट बना दिया गया है, जिससे सुविधाओं में कमी है। जिम्मेदार समस्या दूर कराने के प्रति गंभीर नहीं हैं। डेहमा गांव निवासी अवधेश प्रसाद ने बताया कि रात में प्लेटफाॅर्म पर अंधेरा रहने से बच्चों और बुजुर्गों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में दिक्कत होती है। ताजपुर के तनवीर ने बताया कि इंडिया मार्का तीन हैंडपंप मौजूद है, लेकिन दो खराब हैं। एक हैंडपंप का पानी शुद्ध नहीं है।पूर्वाेत्तर रेलवे वा राणसी के पीआरओ अशोक कुमार ने बताया कि हाल्ट पर सुविधाओं की बहाली के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।