गंगा के जलस्तर में आठ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही है। जल आयोग के अनुसार शुक्रवार की दोपहर तीन बजे तक जलस्तर 54.980 मीटर दर्ज किया गया जबकि सुबह दस बजे जलस्तर 54.500 मीटर था। अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ने से आस-पास के गांवों के लोग सहम गए हैं। फिलहाल गंगा अभी भी खतरे के निशान से 5.125 मीटर नीचे बह रही है। पिछली बार जिस तरह से गंगा ने अपना कहर तटवर्ती व निचली बस्तियों में मचा चुकी है उसे याद कर लोग सहमे हुए हैं। लोगों का कहना है कि इस बार गंगा का जलस्तर जिस तरह से रुक-रुक कर बढ़ रहा है, वह खतरे की घंटी है। एक तरफ कोरोना ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेपटरी किया। अब गंगा के संभावित कहर को लेकर सशंकित हैं। बाढ़ की आशंका से तटवर्ती लोगों की आर्थिक व्यवस्था एकबार फिर बेपटरी होने की आशंका है। ऐसा हुआ तो उनके समक्ष रोजी-रोटी के लाले पड़ सकते हैं। पहले आई बाढ़ में भगीरथपुर, घाटमपुर, कालूपुर, बहलोलपुर, बवाडा, सुजानपुर, युवराजपुर, पटकनियां, गौरा, अड़रिया, सुहवल, बडौरा, पटखौलियां, बहादुरपुर, डारीडीह, बेमुई, रेवतीपुर, नरायनापुर, कल्यानपुर, पकडी, गोपालपुर, नगदीलपुर, दुल्लहपुर, हसनपुरा, बीरऊपुर, रामपुर साधोपुर, टौंगा, उधरपुर आदि गांव काफी प्रभावित हुए थे। जहां लोगों को जन और धन की की क्षति उठानी पड़ी थी।