गांवों में 18 और शहरों में 20-22 घंटे बिजली सपने जैसा हुआ
-शहर से लेकर गांव तक अंधाधुंध बिजली कटौती से लोग परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। बारिश न होने से लोग परेशान हैं। ऐसे में अब बिजली की अंधाधुंध बिजली कटौती ने लोगों का जीवन दुश्वार कर दिया है। खेतों में दरारें पड़ गई हैं। गांवों में 18 और शहरों में 20-22 घंटे बिजली सपने जैसा हो गई है। 10 -12 घंटे आपूर्ति में भी बार- बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या है। उधर, अधिकारी कटौती का कारण ओवरलोडिंग और लोकल फाल्ट बता रहे हैं। यही हाल जिला मुख्यालय से सटे ग्रामीण क्षेत्र का भी है।
भीमापार: हर आधे घंटे से एक घंटे में ट्रिपिंग हो रही है। इससे किसानों से लेकर ग्रामीण भी परेशान हैं। सेवराईः प्रत्येक दिन रोस्टिंग के नाम पर भोर में पांच बजे ही आपूर्ति बंद कर दी जाती है, जो सात बजे तक पुन: बहाल होती है। भोर में बिजली आपूर्ति ठप होने से स्कूल जाने वाले बच्चों सहित घरेलू कामकाजी महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मरदह: ग्रामीण अंचल में रोस्टर के हिसाब से 18 घंटे बिजली आपूर्ति होनी चाहिए, लेकिन आठ से दस घंटे ही बिजली नसीब हो पा रही, उसमें भी रोस्टिंग की जा रही। लो बोल्टेज से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौधा: अनौनी बाजार स्थित सौना विद्युत उपकेंद्र का बदहाल है। जहां जानकारी के बाद भी समस्याओं को निपटाने में काफी समय लग जाता है। इससे लोगों के रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
जमानिया: लोकल फाल्ट के चलते बिजली कटौती इन दिनों अधिक हो रही है। जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पांच घंटे भी नहीं मिल रही बिजली
करंडा। पिछले दो महीने से करंडा क्षेत्र के लोगों को पांच घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। जबकि करंडा में आमजन तक बिजली पहुंचाने के लिए चोचकपुर, मैनपुर, करंडा और सीतापट्टी नागाबाबा चार उपकेंद्र बनाए गए हैं। इन चार विद्युत उप केंद्रों से लोगों को पांच घंटे भी सुचारू रूप से बिजली नहीं मिलती है। अधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है।
बहुमुश्किल 3 घंटे मिल रही बिजली
नंदगंज/ दुल्लहपुर। नदगंज विद्युत उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं को पिछले कई दिनों से रात में एक से तीन घंटे बिजली कटौती की जा रही है। रोस्टरिंग के नाम पर कटौती और लो वोल्टेज से लोगों में नाराजगी है। अवर अभियंता गौतम ने बताया कि ओवरलोड की वजह से ट्रिपिंग की समस्या आ रही है।
वहीं, दुल्लहपुर क्षेत्र के जलालपुर धनी विद्युत उपकेंद्र से संबंधित 65 गावों में बिजली की अघोषित कटौती से किसान परेशान है। मुश्किल से तीन घंटे बिजली मिल रही है। उसमे हर दो मिनट पर ट्रिप होने से कई किसानों उपकरण जल गए। आंधिशासी अभियंता मनीष कुमार विशाल ने कहा कि किसान सूखे से ग्रसित है और लगातार किसान अपने ट्यूबेल को चालू करके छोड़ दे रहे हैं। जिससे लोड बढ़ने से बार-बार बिजली ट्रिप हो रही है।
जितनी बिजली मिल रही है, उतनी आपूर्ति हो रही है। लोड बढ़ने से कुछ क्षेत्र में समस्या आ रही है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दुरुस्त किया जाएगा। - पुरन चंद्र, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम।
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बारिश, बिजली के बाद नहरों की बेरुखी ने किसानों की बढ़ाई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
मौधा। जहां एक ओर बादलों की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं दूसरी ओर बिजली की आंख मिचौली के चलते किसान नलकूपों से भी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। बावजूद इसके क्षेत्र में शारदा सहायक खंड 36 की नहरों में पानी का न आना किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
कहने को क्षेत्र में शारदा सहायक खंड 36 का जाल बिछा हुआ है। इनसे औड़िहार और अमुवारा दो राजवाहा निकलते हैं। जिनकी लंबाई क्रमशः 13 और 16 किलो मीटर है। इनकी सिंचन क्षमता 17 गांवों की 2420 हेक्टेयर भूमि है। जबकि आलमपुर, सिंगारपुर, सौना, परसांवा, अनौनी, गौर, खानपुर और ताजपुर माइनरों की कुल लंबाई 22 किलोमीटर से अधिक है। इनकी सिंचन क्षमता 20 गांवों की 2457 हेक्टेयर भूमि है। लेकिन इन नहरों और माइनरों का संचालन अभी तक नहीं किया जा सका है। उधर, मानसूनी सीजन के जून, जुलाई और अगस्त तीन अहम महीनों में इतनी भी बारिश नहीं हो सकी है कि खेतों में जरा भी बारिश का पानी टिक सके। अभी मानसूनी सीजन (15 सितंबर) खत्म होने में महज दो सप्ताह बचे हैं। ऐसे में इन दिनों में भी यदि बारिश ने जोर नहीं पकड़ा, तो सूखा पड़ने के आसार बढ़ जाएंगे। हालत यह है कि आए दिन मौसम के उतार चढ़ाव में कभी तेज धूप तो कभी बूंदाबांदी से धान की फसलें बुरी तरह प्रभावित होने लगी हैं। किसानों का कहना है कि मौसम और नहरों का यदि यहीं हाल रहा तो सारी फसलें खैरा, माहू और पीला मौजेक रोग की चपेट में आ जाएंगी। चूंकि मोटर से पानी देने में अधिक व्यय आता है। इसलिए खेती की लागत भी हाथ से निकल जाएगी।
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शारदा सहायक खंड 36 की क्षमता 542 क्यूसेक की है। इतना पानी छोड़ भी दिया गया है। लेकिन गाजीपुर जनपद की सीमा तक पहुंचते पहुंचते प्रेशर बहुत कम हो जाता है। इसलिए टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल हो जाता है। -मनोज कुमार, सहायक अभियंता, शारदा सहायक खंड 36।
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