फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: देश का इकलौता स्टेडियम जहां आठ वर्ष की उम्र से ही खेलने लगते हैं हॉकी

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। करमपुर गांव स्थित मेघबरन सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम ने हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह देश का इकलौता स्टेडियम है जहां आठ वर्ष की उम्र से ही बच्चे हॉकी स्टिक पकड़ लेते हैं। जबकि आमतौर पर 12-14 वर्ष के बच्चे इस खेल की तरफ रुख करते हैं। इस स्टेडियम में 8-10 वर्ष की उम्र के करीब 35 बच्चे सुबह-शाम अभ्यास करते दिख जाएंगे। इनका कहना है कि ये हॉकी में ही अपना कॅरिअर बनाएंगे। इन बच्चों की सोच यूं ही नहीं बनी। इनका कहना है कि इस स्टेडियम से हॉकी का प्रशिक्षण लेकर कामयाबी हासिल करने वाले खिलाड़ियों से उनको प्रेरणा मिलती है। इस स्टेडियम के 50 से अधिक खिलाड़ी देश की अलग-अलग टीमों का हिस्सा हैं। स्टेडियम के निदेशक पूर्व सांसद राधे मोहन सिंह कहते हैं कि स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहे बच्चों के पौष्टिक आहार का पूरा ध्यान रखा जाता है। इन्हें रोज सुबह दूध और चना दिया जाता है। संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाती है। खेलो इंडिया और स्टेडियम की ओर से बच्चों को हॉकी स्टिक दी जाती है।पूर्व सांसद का कहना है इस स्टेडियम से 20 से अधिक प्रशिक्षित खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का जलवा बिखर रहे हैं। ताजा उदाहरण ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल हैं, जो इसी स्टेडियम से अपने कॅरिअर की शुरुआत कर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। ये दोनों खिलाड़ी इस बार के ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के न सिर्फ हिस्सा रहे, बल्कि शानदार प्रदर्शन कर कांस्य पदक जीतने के साथ हर भारतीय का दिल जीत लिया। बुधवार को ही राजकुमार पाल और जूनियर हॉकी टीम के खिलाड़ी रहे उत्तम सिंह का चयन हॉकी एशियन चैंपियनशिप के लिए हुआ है। दोनों खिलाड़ी आठ वर्ष की उम्र से ही इस स्टेडियम में अभ्यास करते थे। सामूहिक प्रयासों का परिणाम यह है कि मेघबरन सिंह स्टेडियम से निकले कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। स्टेडियम के संचालक अनिकेत सिंह कहते हैं कि स्टेडियम के संस्थापक तेज बहादुर सिंह का योगदान न केवल करमपुर के लिए बल्कि भारतीय हॉकी के लिए भी अमूल्य है। उन्होंने कई एकलव्यों को प्रशिक्षित किया और उन्हें सफलता के मार्ग पर अग्रसर किया। उनकी यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति के सपने और सामूहिक प्रयास एक गांव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिला सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें