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Ghazipur News: नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को फसलों की क्षतिपूर्ति दे सरकार

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करहिया गांव में पंपसेट लगाकर धान की खेत से बारिश का पानी निकालते किसान। संवाद
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गहमर। चक्रवाती तूफान मोंथा के प्रभाव से मौसम के बदले मिजाज ने क्षेत्र के किसानों पर कहर बरपा दिया है। बीते दिनों हुई तेज वर्षा और तूफानी हवाओं ने धान व सब्जी की फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर उन्हें क्षतिपूर्ति अनुदान दिया जाए ताकि वे फिर से खेती की तैयारी कर सकें। किसानों का कहना है कि यह तूफान वर्ष 2014 में आए फेलिन तूफान की यादें ताजा कर गया है। उस समय फेलिन ने कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया था। तब सरकार ने सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिया था। उसी तरह इस बार मोंथा तूफान ने खेतों में पानी भर दिया है। तेज हवा और मूसलाधार बारिश से धान की फसलें खेतों में ही गिरकर सड़ने लगी हैं। कई किसानों ने पंपसेट लगाकर खेतों से पानी निकालना शुरू कर दिया है। किसानों के अनुसार धान की फसल पककर तैयार थी और कटाई शुरू होने ही वाली थी, लेकिन तूफान के असर से डेढ़ से दो फीट तक पानी भर जाने से पूरी फसल चौपट हो गई। करहिया के किसान परमानंद शर्मा और सुमन राम, वहीं खुदरा के किसान अनिल उपाध्याय, घनश्याम उपाध्याय और सियाराम यादव ने बताया कि इस बार धान की बंपर उपज की उम्मीद थी, मगर तूफान ने सब चौपट कर दिया। अब धान की बर्बादी के साथ गेहूं की बोवाई भी प्रभावित होगी। संवाद
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