गाजीपुर। खेतों में पराली जलाने से रोकने के लिए जिला प्रशासन काफी गंभीर हो चुका है। इसके लिए न्याय पंचायतवार जहां टीम गठित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। वहीं टीम पर नजर रखने के लिए तहसील और जिला स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारी देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर के अधिकारियों की ओर से हार्वेस्टर संचालकों और किसानों के साथ बैठक कर जागरूक किया जा रहा है। साथ ही निर्देश न मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। जनपद में करीब एक लाख 51 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई है। ऐसे में शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से अभियान चलाकर हरर्वेस्टर से धान की कटाई कराने वाले किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि बचे अवशेष को खेतों में न जलाए। इसके अलावा, न्याय पंचायतवार लेखपाल और कृषि विभाग के एक कर्मचारी को शामिल कर टीम गठित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, इनकी मानीटरिंग करने के तहसील स्तर में एडीओ एजी तैनात किया जाएंगे, जिससे निगरानी की जा सके। कृषि अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि धान के बचे अवशेष को किसान खेतों में नहीं जलाएं। उसे सड़ाकर अच्छा खाद बना सकते हैं। पराली जलाने से उर्वरा शक्ति में जहां कमी आती है। वहीं, मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है। इसके अलावा मित्र कीट भी मर जाते हैं। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि पराली खेतों में न जलाएं।