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Ghazipur News: छुट्टा पशु बने रहे लोगों के खौफ की वजह

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परेशानी : खेत से लेकर हाइवे तक दिखने लगे हैं पशु, नजरअंदाज करते ही जा सकती है जान
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-छोटी-बड़ी बाजारों में भी दिखने लगे हैं छुट्टा पशु, लोग हो रहे परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जरा गौर से देखिए, इन दृश्यों को...हम आपको, क्या बताना चाहते हैं ये तो निश्चित तौर पर आप समझ गए होंगे। सच पूछिए तो यह बानगी भर है। इसी तरह बेखौफ होकर छुट्टा पशु जिलेभर में विचरण कर रहे हैं। किसानों की फसलों को बर्बाद करने वाले ये छुट्टा पशु अब लोगाें की जान लेने पर उतारू हो गए हैं। शहर की व्यस्त सड़कों से लेकर हाइवे पर ये अपने ही अंदाज में दिखते हैं। अब तो इन्हें देखकर लोग यमराज के दूत तक कहने लगे हैं, क्योंकि रफ्तार में वाहन लेकर जाने वाले यदि जरा से नजरअंदाज किए तो कब ये टकरा जाएंगे यह किसी को नहीं पता। अभी एक सितंबर की रात 10 बजे ही नंदगंज थाना क्षेत्र के हाइवे पर रामदेव मिश्रा निवासी, आरा, बिहार की मौत हो गई।
छुट्टा पशुओं की संख्या इतनी बढ़ गई है कि ये छोटी-बड़ी बाजारों में भी खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं, जो जाम के कारण भी बन रहे हैं। वहीं कई बार तो इनकी वजह से भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लोग गिरकर चुटहिल हो जा रहे हैं। ये दिन-रात इधर से उधर बेखौफ होकर वितरण कर रहे हैं। इन दिनों तो हरेक घर में इन छुट्टा घटनाओं और मौजूदा स्थिति को देखने के बाद ग्रामीण इलाकों में तो अब लोग घरों के बाहर सोने से डरते हैं।
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शादियाबादः शादियाबाद और आस पास के बाजारों में घूमते आवारा पशु हादसों का कारण बन रहे हैं। शादियाबाद थाना चौराहा पर सुबह से लेकर रात तक आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। आवारा पशुओं में अधिकतर सांड हैं, जिनको भगाने पर मारने को दौड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में घूम रहे ये आवारा पशु कई लोगों को चोट भी पहुंचा चुके हैं।
मौधाः छुट्टा पशुओं को पकड़ कर पशु आश्रय स्थलों तक पहुंचाए जाने का शासन का आदेश हवा हवाई साबित हो रहा है। एनएच 31 पर घूमते या सड़क घेर कर बैठे पशुओं को आसानी से देखा जा सकता है। सिधौना, औड़िहार तिराहा, सैदपुर, मदारीपुर, बासूपुर से लेकर देवकली सहित विभिन्न प्रमुख स्थानों पर छुट्टा पशुओं का जमघट लगना अब आम बात हो गई है। इनके इस तरह घूमते रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हालांकि इन छुट्टा पशुओं को पकड़ कर रखने के लिए क्षेत्र में पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। बावजूद इसके पशु सड़कों पर टहल रहे हैं।



57 गो-आश्रय में हैं 8 हजार से अधिक पशु

जनपद में 57 गो-आश्रय हैं। यहां मौजूदा समय में 8 हजार 130 पशु हैं। छुट्टा पशुओं को पकड़वाने की जिम्मेदारी नगर निकायों में ईओ और गांवों में बीडीओ की होती है। लेकिन, मौजूदा समय में दोनों ही स्तर से अधिकारियों द्वारा इस ओर निश्चित रूप से ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे सड़कों पर पशु दिखाई पड़ रहे हैं। जबकि छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए 10 काऊ कैटल वाहन हैं। वहीं पशु पालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सभी गो गो-आश्रय स्थालों में क्षमता से अधिक पशु हैं। पीपनार में बड़ा गो आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा है।


जिस क्षेत्र में पशु सड़क पर यहां अन्य स्थानों पर घूमने की सूचना मिल रही है। उस क्षेत्र के संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया गया है। - एसके रावत, सीवीओ
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पशुओं को पकड़ने वाली मशीन खराब पड़ी है। जल्द इसे दुरुस्त करा कर पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा। साथ ही दूध नहीं देने पर जो लोग गायों को खुला छोड़ देते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।-धर्मेंद्र यादव, खंड विकास अधिकारी, सैदपुर
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