गाजीपुर। ग्राम पंचायत अधिकारी पिता की नौकरी करीब दस वर्षों से पुत्र कर रहा है। यहीं नहीं सरकारी चेक से लेकर रिपोर्ट व पत्रावली पर भी पिता का फर्जी हस्ताक्षर करता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अनियमितता के मामले में पांच बार निलंबित भी हो चुका है, जबकि गैर जनपद के अधिकारियों ने जांच भी की, लेकिन पिता की जगह पुत्र के नौकरी करने की जानकारी उन्हें नहीं हो सकी, जो खुद में एक बड़ा सवाल है। लेकिन, शिकायतकर्ता रामपाल सिंह ने शपथ पत्र देकर जब इसकी शिकायत की तो शासन से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों तक खलबली मच गई। यहीं नहीं मामले को गंभीरता से लेते हुए ज्वाइंट सिक्रेटरी ने जांच कर रिपार्ट देने का निर्देश पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों को दिया है।
शासन से लेकर जिलाधिकारी तक आईजीआरएस और स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायतकर्ता सदर ब्लाक के सकरा गांव निवासी रामपाल सिंह ने शपथ के माध्यम से बताया कि बाराचवर विकास खंड में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी गोपाल सिंह करीब दस वर्षों से अपने दायित्व व कर्तव्य का स्वंय निर्वहन नहीं करते हैं। उनकी जगह उनका पुत्र गौरव कुमार उर्फ आशीष सिंह ग्राम पंचायत अधिकारी का दायित्व निभाता है। यहीं नहीं सरकारी चेक के माध्यम पैसा निकालने का काम अपने पिता का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर करता है। साथ ही सरकारी बिल बाउचर, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा कार्य योजना और कार्यपूर्ति पर भी फर्जी हस्ताक्षर करता है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इससे संबंधित अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी है। बावजूद इसके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि बीते 30 मार्च को असवार गांव में अनियमितता के मामले में लोकायुक्त के निर्देश चंदौली जनपद अपर जिलाधिकारी सहित टीम जांच करने पहुंची थी, बावजूद उन्हें यह जानकारी नहीं हो पाई कि पिता की जगह पुत्र ग्राम पंचायत अधिकारी बना बैठा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ज्वाइंट सक्रेटरी अजय कुमार ओझा ने आरजीआरएस की शिकायत गंभीरता से लेते हुए जांच का निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिया है। जबकि अभी तक जिला स्तरीय संबंधित अधिकारियों द्वारा न तो इस मामले में जांच कराई और न ही अब तक कोई कार्रवाई हो सकी। ऐसे में अब न्याय के न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में डीपीआरओ अंशुल कुमार मौर्या ने बताया कि शिकायत की जांच कराई जा रही है। इसके लिए एडीओ पंचायत को नामित भी किया गया है।