गाजीपुर। सभी थानों में शनिवार को समाधान दिवस का आयोजन हुआ। इस दौरान किसी ने रास्ते की मांग को लेकर तो किसी ने पड़ोसी द्वारा किए कब्जा करने को लेकर प्रार्थनापत्र सौंपा गया। सभी थानों पर मिले प्रार्थनापत्रों में अधिकांश मामले भूमि विवाद से जुड़े रहे। हालांकि मौके पर एक भी मामले का निस्तारण नहीं हो पाया।
साहब मेरा नाम शकुंतला देवी है, मैं बहतुरा गांव की हूं। विपक्षी जबरदस्ती निर्माण कार्य कराने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076, तहसील दिवस, थाना समाधान दिवस पर एक महीने के ऊपर से प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगा रही हूं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। मैं दर-दर की ठोकर खाने पर विवश हूं। अब तो न्याय दिला दीजिए।
मरदह थाने में आयोजित समाधान दिवस में पहुंचे नखतपुर गांव निवासी जयप्रकाश सिंह ने प्रार्थनापत्र देकर बताया कि आबादी की जमीन पर हम दशकों से काबिज हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, उसके बाद भी पुलिस व राजस्व विभाग की मिलीभगत से पड़ोसी द्वारा बार-बार कब्जा किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। इसे रोकने के लिए लगातार 15 दिन से उप जिलाधिकारी कार्यालय, थाना दिवस, तहसील दिवस में चक्कर काट रहा हूं फिर भी न्याय नहीं मिल रहा है। कमोवेश यही स्थिति जनपद के सभी थानों पर आयोजित समाधान दिवस में देखने को मिला। वहीं, जमानिया कोतवाली में उपजिलाधिकारी अभिषेक कुमार की अध्यक्षता में थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जहां 4 प्रार्थना पत्र में से महज 2 मामलों का ही समाधान मौके पर हो पाया। इस दौरान उपजिलाधिकारी ने शेष दो समस्याओं का एक सप्ताह में निस्तारित करने का निर्देश दिया। कासिमाबाद थाने में आयोजित समाधान दिवस में उचौरी गांव निवासी मीरा देवी ने प्रार्थना पत्र न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना था कि घर तक आने-जाने वाला रास्ता गांव के ही एक व्यक्ति ने बांस-बल्ली लगाकर पिछले दो माह से बंद कर दिया है। जबकि यह रास्ता सरकारी नाली पर ढक्कन लगाकर लोगों को आने-जाने के लिए ग्राम प्रधान द्वारा बनवाया गया है। इस रास्ता को खुलवाने के लिए थाना समाधान दिवस पर उप जिलाधिकारी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया है। लेकिन, अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, कागजीपुर निवासी लवजारी देवी ने प्रार्थना पत्र देकर कहा कि वर्ष 2014 में राजस्व ग्राम डुमरांव उर्फ भटवलिया में लगभग 3:45 मंडा खेती की जमीन खरीदी थी। इसमें कई सह खातेदार हैं। सभी लोग अपना अपना हिस्सा जोत बो रहे हैं। लेकिन, हमारे हिस्से की जमीन को गांव का एक व्यक्ति नहीं छोड़ रहा है।