-पिता ने जीवन के अंतिम क्षण में जताई थी विजय से इच्छा, बेटा नाम रौशन कर देना
-सूर्य मिशन में तरांव के इंजीनियर विजय शंकर राय ने निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
अंकुर शुक्ला
गाजीपुर। इसरो ने अपना पहला सूर्य मिशन ''''आदित्य-एल1'''' को लांच कर दिया है। ''''आदित्य-एल1'''' के जरिए इसरो सूर्य का अध्ययन करेगा। इस मिशन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वालों में भांवरकोल थाना क्षेत्र के तरांव गांव निवासी इंजीनियर विजय शंकर राय भी शामिल हैं। इस मिशन में इनकी भूमिका जितनी महत्वपूर्ण है उनके संघर्ष की कहानी उतनी ही प्रेरणादायक है। उनके छोटे भाई इंजीनियर अजय कुमार राय ने बताया कि पिता ने अपने अंतिम समय में जो इच्छा जाहिर की थी उसे बहन का सहारा मिलने पर भाई ने आज पूरा कर दिया।
राम सुंदरी देवी आज अपने बच्चों की सफलता से बेहद खुश हैं। लेकिन यहां तक का सफर बेहद मुश्किलों से भरा है। उनकी तीन बेटियां विमला राय, किरन राय, सरोज राय के बाद बेटे विजय शंकर राय और अजय राय हैं। भाई-बहनों में सबसे छोटे इंजीनियर अजय राय बताते हैं कि विजय भैया की उम्र जब दस वर्ष थी, तभी पिता राम दिलास राय (किसान) की मौत हो गई थी।
अपने अंतिम समय में उन्होंने विजय शंकर को बुलाकर कहा था कि, बेटा मैं तुम्हारा सुख भोग नहीं पाया। लेकिन, मेरा नाम रौशन कर देना और मुझे कुछ नहीं चाहिए। उस समय हम दोनों भाई गांव के ही एक निजी विद्यालय में पढ़ाई करते थे। पिता की मौत के बाद परिवार पर संकट आ गया। मध्यम वर्ग का परिवार आर्थिक रूप से टूट गया, तमाम प्रकार की परेशानी आने लगीं। उस समय मां राम सुंदरी देवी पर एक बेटी और दो बेटों की पढ़ाई और शादी आदि का भार आ गया। ऐसे में उस समय वाराणसी में शिक्षा विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात बहन किरन परिवार का सहारा बनीं। अपने दोनों भाइयों विजय और अजय को अपने साथ वाराणसी (आनंद विहार कालोनी, पहड़िया) लेकर चलीं गईं। तमाम कठिनाइयों और परिस्थितियों को झेलते हुए दोनों भाइयों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने में लग गईं।
6 से 12 तक राजकीय क्विज कॉलेज लहुराबीर में पढ़ाई की। इसके बाद दोनों भाइयों ने लगन से पढ़ाई की और मुकाम हासिल कर लिया। एक निजी मोबाइल कंपनी में इंजीनियर विजय बताते हैं कि चार जून 1981 को जन्मे विजय शंकर राय ने एनआईटी तेलंगाना से मैकेनिकल इंजीनियरिंग से पढ़ाई करने के बाद 2006 में इसरो ज्वाइन किया। इसके बाद कामयाबी की सीढि़यां चढ़ते गए। उन्होंने मिशन आदित्य की लाचिंग के पहले मां राम सुंदरी देवी से फोन पर आशीर्वाद भी लिया।
किरन ने निभाया पिता का फर्ज, बहन को बनाया दरोगा, भाइयों को इंजीनियर
जिन बेटियों को लोग बोझ समझते हैं उनके लिए यह बेहद जरूरी खबर है। वाराणसी के शिक्षा विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात किरन राय के संघर्ष की कहानी जानने वाला हर कोई उनपर नाज करता है और इसी तरह बेटी चाहता है। उनके छोटे भाई इंजीनियर विजय उन्हें भगवान की तरह मानते हैं। वे कहते हैं कि बहन ने बचपन से ही सहारा दिया। उन्होंने पिता की तरह फर्ज निभाया। मां, बहन सरोज राय और हम दोनों भाइयों का सहारा बनीं।
यही वजह रहा कि बहन सीआरपीएफ में दरोगा बनीं और हम दोनों भाई इंजीनियर बन सकें। इन दिनों सरोज के जुड़वा बच्चों को देखने आई मां भी बेटे के इस कामयाबी और बेटी के किए पर नाज करती हैं। अजय बताते हैं विजय की शादी सीवान निवासी सोनाली से हुई है जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीसीए और एमबीए किया है। उनके दो बच्चे सूर्यांश और श्रेया हैं। इंजीनियर विजय शंकर राय इस समय दिल्ली में रहते हैं, लेकिन तरांव और वाराणसी से उनका गहरा नाता है। वे छठ पूजा में गांव और वाराणसी आए थे।