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योगनिद्रा से जगेंगे श्री हरि, होंगे मांगलिक कार्य

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गाजीपुर। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्रीहरि जग जाते हैं। इसलिए वर्ष में पड़ने वाली सभी एकादशियों में इस एकादशी का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इसे प्रबोधनी, देवउठनी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है। देवोत्थान एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। साथ ही द्वादशी तिथि को तुलसी मां के पौधे के साथ शालिग्राम का विवाह भी कराया जाता है। पंडित वरुण त्रिपाठी ने बताया कि वैसे तो द्वादशी के दिन शालिग्राम व तुलसी विवाह के उपरांत मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा विवाह मुहूर्त में मास, नक्षत्र, तिथि, दिन, लग्न और लग्न शुद्धि आदि का भी विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन इन सब में इस बात का विशेष ध्यान देना होता है कि शुक्र भी उदय हो। जबकि 29 सितंबर से शुक्र अस्त चल रहे हैं। इसलिए इन दिनों मांगलिक एवं शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस दौरान किए गए कार्यों के शुभ एवं अच्छे परिणाम नहीं मिलते हैं। 20 या 21 नवंबर को शुक्र उदय होंगे। तभी विवाह के शुभ मुहूर्त मिलेंगे। नवंबर में 25 तारीख और दिसंबर में 2, 7, 8, 13 और 15 को लग्न का मुहूर्त है। इसके बाद 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में चले जाने से खरमास प्रारंभ हो जाएगा। इसलिए खरमास के दिनों में हलवाई, बैंड बाजा, आतिशबाजी, टेंट हाउस संचालक, सजावट सहित अन्य कारोबार से जुड़े धंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
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