मौधा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर सैदपुर नगर का बहुुत ही पुरातन इतिहास है। सैदपुर नगर में नगरीय सभ्यता के प्रारंभ से ही लगभग दो सौ वर्षों से जन्माष्टमी मनाने की परंपरा यहां आज भी कायम है। जन्माष्टमी के दिन पूरे नगर के लोग अपने-अपने घरों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की एक से बढ़कर एक अद्भुत झांकियां अपार श्रद्धा से सजाते हैं। नगर के सभी मंदिरों और घरों को दीयों और झालरों से सजाया जाता है। श्रद्धा इतनी कि प्रत्येक घर में एक व्यक्ति अवश्य ही व्रत रखता है। शाम के समय नगर निवासी एक-दूसरे के घर एवं मंदिरों पर जाकर भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद प्राप्त करते हैं। इसके बाद अंत में अपने-अपने घरों में सभी भक्त रात के 12 बजे श्रीकृष्ण की आरती पूजन करके भगवान का जन्मोत्सव पूर्ण करते हैं। जन्म के समय रात 12 बजे के बाद भी प्रसाद के लिए आमजन एवं श्रद्धालुओं की चहल-पहल पूरे नगर में बनी रहती है। नगर के पूरब बाजार से लेकर रंगमहल तक एवं पक्का घाट से लेकर सब्जी मंडी तक जन्माष्टमी के दिन पूरा नगर ही कृष्णमय हो जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि हम मथुरा-वृंदावन में मौजूद हैं। पूरे नगर में एक आनंद का माहौल उत्पन्न हो जाता है। बच्चे तो इस उत्सव के लिए विशेष लालायित रहते हैं। प्रत्येक घरों में बच्चों के द्वारा ही जन्माष्टमी धूमधाम से सजाई जाती है।