ग्रामीण इलाकों के अस्पताल में धूल फांक रही मशीन
जिला अस्पताल में दस बेड का संचालित हो रहा आईसीयू, वेंटिलेटर का नहीं हो रहा प्रयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। कोरोना महामारी के दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए शहर सहित ग्रामीण इलाकों में स्थापित सरकारी अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को नहीं मिल रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में संचालित दस बेड के आईसीयू वार्ड में मरीजों को भर्ती कराया जा रहा है। जबकि करीब उपलब्ध 69 वेंटिलेटर जरूरत पड़ने पर उपयोग में लाए जाते हैं। लेकिन इससे इतर सीएचसी पर मशीनें धूल फांक रही हैं।
कोरोना संक्रमण काल के दूसरे चक्र के प्रभाव को देख स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला अस्पताल में दस बेड के आईसीयू वार्ड और वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई थी। जबकि ग्रामीण इलाकों में तहसील स्तर के सीएचसी को चयनित कर इन सुविधाओं से लैस किया गया था, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। कोरोना महामारी के समाप्त होने के बाद तहसील स्तर पर बने पांच बेड के आईसीयू और वेंटिलेटर कहीं धूल फांक रहे हैं तो कहीं कपड़ों से ढंक कर रख दिया गया।
आपात स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को इन सीएचसी पर इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अगर जिला अस्पताल की बात करें तो दस बेड के आईसीयू वार्ड में मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार तो किया जा रहा है, लेकिन वेंटिलेटर जस के तस पड़े हुए हैं। जबकि शासन की ओर से इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस संबंध में जिला अस्पताल के सीएमएस डा. राजेश सिंह ने बताया कि दस बेड का आईसीयू वार्ड है, जिसका संचालन हो रहा है। जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर का प्रयोग किया जाता है।