तहसील क्षेत्र के गंधुतालुका क्षेत्र में सोमवार को कर्मनाशा में अचानक जलस्तर बढ़ जाने से दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गये तथा जिन लोगों का रिहाइशी मकान बाढ़ के पानी से डूब गया वह प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए हैं। जलस्तर बढ़ने की सूचना पर एसडीएम एवं तहसीलदार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। क्षेत्र के ग्राम गायघाट पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया है तथा पशुपालक गांव के मुख्य मार्ग पर अपने-अपने पशुओं को लेकर अपना रावटी बना लिया है। गांव में चारो तरफ पानी लग गया है तथा लोग अपने घरों में घिरे हुए हैं। ग्राम धुस्का की मल्लाह बस्ती एवं आंशिक दलित बस्ती पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गई है तथा रिहाइशी मकान में भी पानी घुस गया है जिससे करीब 35 परिवार अपने पशुओं एवं सभी सामानों के साथ गांव के प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए हुए हैं। पूर्व प्रधान अशोक राम ने बताया कि अचानक पानी बढ़ जाने से लोग काफी परेशान हो गए। नाव की सहायता से घर-गृहस्थी का सारा सामान लेकर लोग प्राथमिक विद्यालय पर शरण लिए हुए हैं। अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई है। वहीं रायपुर कसेरुआ करमहरी देवढ़ी, दाउदपुर, गायघाट, धुस्का आदि गांव के सिवान में कर्मनाशा नदी का पानी घुस गया है जिससे धान की पूरी फसल बर्बाद होने के आसार बन गए हैं। जलस्तर बढ़ जाने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी हुई है। किसी को फसल की चिंता है तो किसी को घर-गृहस्थी बचाने की चिंता है। हालांकि मंगलवार की सुबह से ही धीमी गति से जलस्तर कम होने से ग्रामीणों में राहत है। ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर कम हो रहा है। ऐसे ही पानी कम होता रहा तो रात तक ज्यादा पानी कम हो जाएगा। तहसील के आला अधिकारियों के निर्देश पर लेखपाल लगातार संबंधित गांवों का दौरा कर रहे हैं तथा ग्रामीणों से वार्ता कर अधिकारियों को सूचित कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों की हर सम्भव मदद के लिए बाढ़ चौकी तहसील में स्थापित की गई है। इस संबंध में तहसीलदार घनश्याम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा किया जा रहा है और जरूरत के अनुसार नाव आदि मुहैया कराई जा रही है। राजस्व कर्मियों को हल्के में तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।