गाजीपुर। टीबी रोड (ताड़ीघाट-बारा मार्ग) दो प्रदेशों को जोड़ती है। इस मार्ग पर काफी दिनों से केवल हल्के वाहनों का ही संचालन हो रहा है। इसके बावजूद यह सड़क दम तोड़ती हुई नजर आ रही है। कई स्थानों पर सड़क में दरार आ गई है। जबकि यह मार्ग छह वर्ष पहले 218 करोड़ रुपये बनाया गया है।
39 किलोमीटर लंबी टीबी रोड जनपद में उप्र और बिहार को जोड़ने का काम करती है। वर्ष 2016 से पहले काफी वर्षों तक यह बदहाल रहा। इसके कारण आवागमन में क्षेत्रीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। वर्ष 2016 में इसका शिलान्यास किया गया। दो वर्षों में 2018 में सीसी मार्ग बनकर तैयार हुआ। क्षेत्र के लगभग 70 गांवों के लोगों को उम्मीद जगी कि अब आवागमन में सहूलियत होगी। लेकिन, लोड बढ़ने से गंगा पर निर्मित वीर अब्दुल हमीद सेतु कमजोर हो गया। इसके बाद भारी वाहनों के आवागमन पर जिला प्रशासन की ओर से रोक लगा दी गई। इससे टीबी रोड पर भी भारी वाहनों का संचालन बंद है। इसके बाद भी लगभग दो वर्षों से टीबी रोड पर जगह-जगह दरारें उभरने लगीं। कई जगहों पर मार्ग के बीचोबीच चौड़ी दरारें आ गईं है। एनएचआई की ओर से इन दरारों में पिचिंग करके का कार्य किया गया। लेकिन, वर्तमान में नौ स्थानों पर फिर से दरारें आ गईं हैं। इन दरारों से सड़क की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।लोगों का कहना है कि अभी तो केवल हल्के वाहनों का आवागमन टीबी रोड पर हो रहा है। रेल सह रोड ब्रिज पर भारी वाहनों का अवागमन शुरू होने के बाद यह सड़क कितने महीने तक टिक पाएगी, यह एक यक्ष सवाल है।
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इन स्थानों पर नजर आ रहीं दरारें
जिला मुख्यालय से रेवतीपुर जाते वक्त सुहवल पेट्रोल पंप के थोड़ा आगे बाएं साइड की ओर टीबी रोड पर दरारें हैं। इसको भरने के लिए पूर्व में पिचिंग का कार्य किया गया था, लेकिन अब पुन: नजर आ रही हैं। इसी तरह गहमर क्षेत्र के दीपक होटल, पूरब पोखरा, कोरावीर गांव, खुदरा, करहिया के पास दरारें नजर आएंगी। कुछ यही हाल बारा क्षेत्र में है।
दरारों में फंसते हैं वाहनों के पहिये
रेवतीपुर क्षेत्र के पकड़ी गांव के पास टीबी रोड के मध्य हिस्से में ज्वाइंटर में दरार आ चुका है। इसको भी भरने के लिए पिचिंग कार्य किया गया था। लेकिन अब पिच हट चुकी है। इसके कारण बाइक सवारों के पहिये इसमें फंसते हैं। इससे हादसे की संभावना बनी रहती है।
टीबी रोड पर जिन स्थानों पर दरारें उभर आई हैं। बरसात के बाद दरारों को भरा जाएगा। पूर्व में भी दरारें आई थीं, जिनकी फिलिंग करा दी गई थी। अमित कुमार, जेई एनएचआई