गाजीपुर। गंगा का जलस्तर रविवार को भी घटाव पर था। एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर घट रहा था। लेकिन, भांवरकोल क्षेत्र और गहमर में कटान जारी है। दोनों क्षेत्रों में दो-दो बीघा कृषि योग्य भूमि गंगा में समाहित हो गई। वहीं 10 दिन पहले भांवरकोल क्षेत्र के शेरपुर निवासी दीपक चौधरी की दो डेंगी नाव गंगा में डूब गईं।
सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 61.950 मीटर दर्ज किया गया। वहीं दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 61.910 मीटर दर्ज किया गया। सुबह से लेकर दोपहर तक एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा नदी घट रही थी। वहीं गंगा नदी अभी भी चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से ऊपर बह रही है। इस दुश्वारियां बरकरार है। तटवर्ती इलाकों के खेतों में पानी पसरा है। कई मार्ग अभी भी जलमग्न हैं। भांंवरकोल : क्षेत्र के मुबारकपुर के पास जलालपुर में कटान जारी है। दो बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में बह गई। प्रभावित किसानों विनोद राय और रविंद्र ने बताया कि उनका भूखंड गंगा नदी में चला गया। कटान रोकने के लिए बनाए गए बोल्डर पिचिंग डेढ़ सौ बस्ती के पास क्षतिग्रस्त हो गई है। कटान जारी रहने पर राजकीय नलकूप तथा प्राथमिक विद्यालय मुबारकपुर के अस्तित्व को खतरा मंडरा रहा है। गहमर : कटान होने के कारण सोझवा घाट के पास दो बीघा भूमि गंगा में विलीन हो गया। इसके कारण तटवर्ती क्षेत्रों के किसानों में हड़कंप मचा हुआ है।
धीरे-धीरे कम हो रहा बाढ़ का पानी
गाजीपुर। रेवतीपुर क्षेत्र के निचले इलाकों में गंगा का पानी धीरे-धीरे नीचे उतर रहा है। क्षेत्र के नसीरपुर, अठहठा, हसनपुरा, विरऊपुर परमानंदपुर, दुल्लहपुर आदि गांवों में बाढ़ का पानी अब कम हो रहा है। हालांकि रेवतीपुर-गहमर बाइपास मार्ग पर अभी भी पानी है। इस कारण आवागमन बंद है। वहीं पानी इकट्ठा होने से नसीरपुर-अठहठा-हसनपुरा मार्ग पर भी आवागमन ठप है। इससे हसनपुरा से नसीरपुर गांव के निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बाढ़ का पानी तो कम हो रहा है, लेकिन दुश्वारियां बढ़ रही हैं। बाढ़ की पानी में डूबे हुए पौधों के सड़ने के कारण बदबू गांवों में फैल रही है।
गांवों का एक-दूसरे से शुरू हुआ जुड़ाव
औड़िहार। सैदपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गंगा और गोमती दोनों नदियों के जलस्तर में घटाव है। इससे तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है। निचले इलाकों में रहने वालों का संपर्क दूसरे गांव से टूट गया था, अब धीरे-धीरे उनके लिए सुगमता बढ़ने लगी है। हालांकि अभी भी 50 बीघे से ज्यादा बोई गई फसल जलमग्न है। दोनों नदियों के किनारे ज्वार, बाजरा की फसलों के अलावा सब्जी की खेती को भी नुकसान हुआ है। गोमती नदी के किनारे बसा गौरहट तीन ओर से पानी से घिर गया था। गांव का संपर्क दूसरे गांवों से टूट गया था, लेकिन पानी घटने से अब गांवों का परस्पर संबंध जुड़ना शुरू हो गया है।