बारा। मुकद्दस रमजान का महीना नजदीक है। अगर चांद 30 को होता है तो 14 अप्रैल से मुस्लिम समुदाय रोजे रखना शुरू करेगा। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। जहां मस्जिदों में रंगरोगन हो गया है और इबादत के लिए सामान मुहैया हो गए हैं वहीं घरों में भी महिलाओं अपनी तैयारियों का अंतिम रूप दे दिया हे। सोमवार को बाजारों में लोगों ने इफ्तार और सहरी के सामानों की खरीदारी की। जबकि इबादत की तैयारियां भी की जाती रहीं। मस्जिदों में विशेष नमाज ‘तरावीह’ की भी तैयारियां हैं। कोविड गाइड लाइन के पालन के साथ इन्हें अदा किया जाएगा। मौलान कालीमुद्दीन शम्सी ने बताया कि रमजान के महीने में ही कुरान नाजिल की गई थी। इस पाक माह में एक नेकी का सत्तर गुना सवाब मिलता है। इस महीने अल्लाह पाक (ईश्वर) अपने बंदों के मगफिरत के लिए नेकी के सारे दरवाजे खोल देता है। मौलाना सालिम अबुंसर आली ने कहा कि माहे रमजान इस्लामी साल का वह पवित्र महीना है,जिसमें इंसानों की हिदायत और रहनुमाई के लिए अल्लाह पाक ने अपने मुकद्दस कलाम कालमे पाक का नजूल (अवतरित) किया। इस महीने में एक ऐसी रात भी है, जिसमें की गई इबादत हजार महीने की इबादत के बराबर है। इस महीने में अधिक से अधिक पुण्य का काम करना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों से अपील की है कि वह इबादत के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन करें।