भरत मिलाप के बाद बृहस्पतिवार की रात अयोध्या (हरिशंकरी) में खुशियां मनाई गई। पहली बार 5100 दीयों से रामलीला स्थल को जगमग किया गया। भजन कीर्तन के बीच लोगों ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम, सीता का आशीर्वाद लेकर अपने को धन्य किया
अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से ऐतिहासिक भरत मिलाप में लोगों की भीड़ उमड़ी। श्रीराम लक्ष्मण लंकापति रावण का वध करने के बाद लंका का राजपाठ विभीषण को देकर सीता, लक्ष्मण सहित वानरी सेनाओं के साथ लंका से पुष्पक विमान से अयोध्या (हरिशंकरी) के लिए प्रस्थान करते हैं। रास्ते में भारद्वाज मुनि के आश्रम में विश्राम करते है, इसी दौरान श्रीराम हनुमान को आने का संदेश भेजते हैं।
श्रीराम का संदेश लेकर हनुमान भरत के पास आतेे हैं। सूचना पाकर गुरू वशिष्ठ के साथ भरत शत्रुघ्न अपने बड़े भाई श्रीराम व लक्ष्मण से मिलने (हरिशंकरी से) चल देते हैं। श्रीराम अपने भरत से मिलने को आतुर होते हैं। थोड़े दिनों में भरत भारद्वाज मुनि के आश्रम से दूर (सकलेनाबाद) में रात 12 बजे ही पर रथ से उतरकर श्रीराम को साष्टांग दंडवत करते हैं। श्रीराम भरत को उठाकर अपने गले लगा लेते हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को सभी अयोध्या (हरिशंकरी) पहुंचते हैं। यहां खुशियां मनाई जा रही होती हैं। लोग भजन-कीर्तन करते हैं। साथ ही पहली बार 5100 दीये जलाए जाते हैं।