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Ghazipur News: राजकुमार बोले, हर मैच से पहले मां से करता हूं बात, ऊर्जा मिलती है

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गाजीपुर/औड़िहार। पेरिस ओलंपिक में हॉकी में कांस्य मेडल जीतकर अपने घर करमपुर लौटे भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी राजकुमार पाल का जनपद में जोरदार स्वागत हुआ। उन्होंने कहा कि मैं हर मैच से पहले मां से बात करता हूं। इससे मुझे ऊर्जा मिलती है।
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करमपुर स्टेडियम पहुंचते ही उन्होंने अपनी मां मनराजी देवी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद मेडल मां के गले में डाल दिया। गले मिलकर मां-बेटे दोनों भावुक हो गए। फिर मोबाइल निकालकर मां के साथ फोटो खींचवाई। इसके बाद राजकुमार ने मेडल तेज बहादुर सिंह के चित्र को पहनाया।

स्वागत के दौरान मी़डिया से बातचीत में राजकुमार पाल ने कहा कि मैं अपने सपने के करीब आ गया हूं। ओलंपिक में टीम को पूरा भरोसा था कि हम फाइनल खेलेंगे। हमारा लक्ष्य था कि मेडल लेकर जाना है। इंग्लैंड से मैच के बाद हमलोगों ने रणनीति बनाई, जिसके तहत खेला और वो काम आई। लोगों को भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा कि अगले ओलंपिक में हमें मेडल का रंग बदलना है।
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इसके पहले बाबतपुर एयरपोर्ट पर पूर्व सांसद राधे मोहन सिंह ने हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय और राज कुमार पाल का स्वागत किया।

खेल प्रेमियों का काफिला एयरपोर्ट से बाहर आते ही दोनों खिलाड़ियों को मालाओं से लाद कर कंधे पर उठा लिया। यह काफिला औड़िहार होते हुए करमपुर गांव तक आया। बड़े भाई जोखनपाल व छोटे भाई राजू पाल के अलावा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक होनहार खिलाड़ी को माला पहनने के लिए बेताब दिखे।

अपने परिवार से मिलकर राजकुमार भावुक हो गए। राजकुमार पाल ने मेघबरन स्टेडियम के संस्थापक स्वर्गीय तेज बहादुर सिंह के चित्र पर अपना मेडल पहनाकर उनका आशीर्वाद लिया। कहा, जो उनसे सीख मिली है, उसी के बल पर भारत के नक्शे में करमपुर का नाम अभिन्न रूप से जुड़ गया है।

अंतरराष्ट्रीय फलक पर खेलते हुए यहां की मिट्टी की याद आती है। समारोह की अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता राम तेज पांडे तथा संचालन मेघबरन पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर नागेंद्र पाठक ने किया। मौके पर हॉकी अकादमी के निर्देशक अनिकेत सिंह, प्रमोद सिंह, रमाशंकर सिंह हिरण ,मनोज सिंह हॉकी कोच इंद्रदेव राजभर आदि रहे।
स्वागत से भावुक हूं: राजकुमार पाल
हॉकी खिलाड़ी राजकुमार पाल ने कहा कि देशवासियों और मां की दुआ मेरी लिए काम आई। मैं अपने स्वागत से भावुक हूं। उन्होंने मीडिया से अपने बचपन के दिनों की यादों को साझा किया। कहा कि छोटा था तो बांस को हॉकी बनाकर खेलता था। कहा कि मेघबरन स्टेडियम नहीं होता है शायद हम इस मुकाम पर नहीं होतेे। मैच के दौरान किस तरह से उन्होंने प्रदर्शन किया इस बारे में भी विस्तार से बताया।
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