हमीद सेतु पर स्थित रेल सह सड़क पुल जल्द ही पुल करोड़ की लागत से जगमगाएगा। लाइटें फ्लैश वाली कलर युक्त होगी। इसका ट्रायल भी कार्यदायी संस्था ने सकुशल पूरा कर लिया है। इन लाइटों की रोशनी से रेल सह सड़क पुल चारों तरफ से जगमगा उठा। इस दौरान उसके पास में स्थित हमीद सेतु से गुजर रहे लोगों ने इस मनमोहक दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने से नहीं चूके। पुल के उपरी हिस्से सड़क पर करीब 108 लाइट और रेल पुल में करीब 386 लाइट लगाई जानी है, जो बारह विभिन्न रंगों की रोशनी से जगमगाएगा। लाइट की डिजाइन फिलिप्स कंपनी ने तैयार की है।
रेल सह सड़क पुल को बनाने में करीब 420 करोड़ की लागत आई है, जो बनकर करीब तैयार हो चुका है। इसका ट्रायल मार्च में सुनिश्चित है। अब इस पर लाइट लगाने का काम बहुत जल्द शुरू होने की उम्मीद है। रेल सह सड़क पुल वाराणसी में वर्ष 1857 में निर्मित मालवीय ब्रिज से भी लंबा है। मालवीय ब्रिज की लंबाई तो करीब एक हजार मीटर है, जबकि जनपद में गंगा पर बन रहे रेल सह सड़क पुल की लंबाई करीब 1100 मीटर है।
यही नहीं बन रहा यह पुल प्रदेश का पहला रेल सह सड़क पुल है जो नवीन तकनीकी का एक उम्दा उदाहरण बनेगा। प्रदेश में कोई ऐसा रेल सह सड़क पुल नहीं है। जनपद के इस पुल का निर्माण स्ट्रील ट्रस डिजाइन के आधार पर कराया जा रहा है। इस संबंध में आरवीएनएल ( इलेक्ट्रिक) के जीएम पीयूष कुमार ने बताया कि बहुत जल्द ही इन लाइटों को लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
पुल की क्षमता प्रति वाहन सौ टन निर्धारित
गाजीपुर। रेल सह सड़क पुल की क्षमता प्रति वाहन सौ टन निर्धारित की गई है। इसकी उम्र 100 साल है। जनपद में तैयार हो रहा यह रेज सह सड़क पुल रेलवे के फेसमिक जोन तृतीय में हैं, जो भूकंप से पूरी तरह सुरक्षित है। बावजूद अगर भूकंप आ जाए तो 7.2 रिक्टर स्कैल के तीव्रता से भी सुरक्षित रहेगा।