टीवी धारावाहिक महाभारत के संवाद लेखक और मशहूर साहित्यकार राही मासूम रजा की 96 वीं जयंती बघुई बुजुर्ग गांव स्थित डॉक्टर राही मासूम रजा कांवेंट स्कूल में मनाई गई।
इस मौके पर डॉक्टर राही मासूम रजा शिक्षा समिति के कोषाध्यक्ष और उनके भतीजे सैय्यद मोहम्मद रफी ने कहा कि वे धारा के विपरीत चलने वाले साहित्यकार थे। वो अपने उसूलों के पाबंद थे। उसूलों के खातिर एक बार वे अपने अपने पिता के ही विरोध में उतर आये थे। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित थे। जब वो गाजीपुर में रहते थे तो उस समय कम्युनिस्ट नेता पब्बर राम को गाजीपुर नगर पालिका के अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था। जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने उनके पिता और शहर के मशहूर वकील बशीर हसन आबिदी को पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। पिता की उम्मीदवारी ने उनके सामने मुश्किल हालात पैदा कर दी, कि वो पिता का प्रचार करें या अपनी पार्टी का। वे और उनके बड़े भाई मुनीस रजा ने कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए अपने पिता को समझाया कि वो अपनी उम्मीदवारी वापस ले लें।
पिता को समझाने का दौर कई दिनों तक जारी रहा। लेकिन पिता ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी से उनका पुराना रिश्ता है। पार्टी ने उन्हें बड़ी उम्मीद से मैदान में उतारा है इसलिए वो पार्टी से नाफरमानी नहीं कर सकते हैं। इसके बाद डा. राही मासूम रजा और मुनीस रजा के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। दोनों भाइयों ने अपने पिता के खिलाफ बगावती रुख अपनाते हुए पब्बर राम का चुनाव प्रचार करने का फैसला लिया।
दोनों भाइयों की मेहनत रंग लायी और पब्बर राम चुनाव जीत गये। गाजीपुर शहर में यह खबर आग की तरह फैली कि पब्बर राम जैसे आम आदमी ने जिले के सबसे मशहूर वकील को बड़े वोटों से हरा दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर राही की ठोस उसूलों के कई उदाहरण है। यह विद्यालय उनकी विचारधारा पर ही चल रहा है। स्कूल के प्रधानाचार्य प्रहलाद सिंह ने कहा कि डाक्टर राही गंगा-जमुनी तहजीब के वाहक थे। साहित्य से लेकर बॉलीवुड तक उन्होंने अपने फन का लोहा मनवाया है। महाभारत को उन्होंने लोगों के घर-घर तक पहुंचाया है। उनके साहित्य को पढ़ने से पता चलता है कि उनका शरीर मुंबई में रहता जरुर था, लेकिन उनकी आत्मा गाजीपुर की मिट्टी में रहती थी। डॉक्टर राही को गाजीपुर और गंगा से काफी लगाव था।
उनके कई साहित्य और कविताओं में गंगा का जिक्र है। वे गंगौली गांव के रहने वाले थे, बघुई बुजुर्ग गांव में उनका ननिहाल था। स्कूल का संचालन उनके परिजनों द्वारा किया जा रहा है। उनकी पुत्री मरियम रजा इस स्कूल की हर गतिविधियों पर नजर रखती हैं। इस मौके पर डॉक्टर राही मासूम रजा कान्वेंट स्कूल के शिक्षक सैयद मोहम्मद अब्बास, हरिंदर राजभर, सिकंदर सिंह, अफसाना, राजेश यादव, सोनी, इस्मत जहरा और रविंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र और स्थानीय लोग मौजूद थे।
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तीन सितंबर को जनपद में आएंगे खेल राज्य मंत्री
गाजीपुर। खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव का तीन सितंबर को जनपद में आगमन होगा। वह दि में 1.45 बजे लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में पहुचेंगे और 2 बजे जिला पंचायत सभागार में मोदी 2.0 कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। इसके बाद 3 बजे जनपद से प्रस्थान करेंगे।
वरिष्ठ साहित्यकार का मना जन्मदिन
वरिष्ठ साहित्यकार का मना जन्मदिन
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। वरिष्ठ साहित्यकार हरिनारायण हरीश का 78 वां जन्मदिन नगर के तिलक नगर स्थित उनके आवास पर समारोह पूर्वक मनाया गया। साथ ही उन्हें बंधाई भी दी।
साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने उनसे से जुड़े अपने संस्मरण साझा किया। इस अवसर पर कवियों ने अपनी रचना सुनाई। डा. अक्षय पांडेय ने अपनी पंक्तियां जाल नदी के भीतर है, हर पत्थर पर काई। हम न कहेंगे तो कौन कहेगा युग की सच्चाई सुनाकर कलमकारों को दायित्व बोध कराया।अमरनाथ तिवारी अमर ने अपनी व्यंग्य रचना सुनाकर लोगों को गुदगुदाते हुए सोचने के लिए विवश किया। कामेश्वर द्विवेदी ने अपने गंगा प्रबंध काव्य से कई छंद सुनाकर गंगा की महिमा का वर्णन किया। आकाश विजय त्रिपाठी ने शिव वंदना प्रस्तुत की। डॉ.संतोष तिवारी ने अपनी रचना के माध्यम से वर्तमान विसंगतियों की ओर सभी का ध्यान आकृष्ट किया।गोपाल गौरव ने अपनी गजल सुनाकर आनन्दित किया। हरिनारायण हरीश ने मिथकों पर आधारित अपनी चर्चित रचना कर्ण सुनाकर ढेर सारी वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अध्यक्ष अनंतदेव पांडेय अनन्त ने चर्चित रचना गंऊवों गांव बुझाते नइखे, अब कतहीं ऊ बाते नइखे सुनाकर आयोजन को ऊंचाई प्रदान की। इस अवसर पर प्रमुख रूप से रामजी केशरी,वंश नारायण राय,अनुराग सिंह,मंजू हरीश,अनामिका सिंह,अक्षिता,रक्षित संगीता तिवारी,रागिनी तिवारी आदि उपस्थित थीं।अंत में हरिनारायण हरीश ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।