इसके बाद अधिकारियों ने जवान के बड़े भाई राज यादव सहित ग्रामीणों को समझाया। हालांकि राहगीरों की तकलीफों को देखते हुए, प्रदर्शनकारी निजी खुले पिकअप को सजाकर उससे जवान का पार्थिव शरीर ले जाने पर सहमत हुए। इसके बाद पार्थिव शरीर ताबूत सहित पिकअप पर रखवाया गया और भारत माता की जयकारों के साथ तिरंगा लहराते हुए घर निकले।
ग्रामीणों ने हाईवे किया जाम
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लोगों में नाराजगी तो थी लेकिन प्रदर्शन में कोई उग्रता नहीं थी। माइक से बार-बार अपील की जा रही थी कि कोई कानून अपने हाथ में नहीं लेगा। एंबुलेंस और परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों की गाड़ियों को कोई नहीं रोकेगा। इससे लोग प्रदर्शनकारियों के समर्थन में भी नजर आए।
हवलदार राजेंद्र यादव का पार्थिव शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। रीता देवी और मां नागेश्वरी देवी की तो दुनिया ही उजड़ गई। आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। पति का पार्थिव शरीर देखते ही बेसुध हो गई। वह अपने दोनों बच्चों अंश (7) और आयुष (5) के साथ खड़े होकर बस एकटक पति के पार्थिव शरीर को देख रही थी। जिसे देख मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
हवलदार राजेंद्र यादव का अंतिम संस्कार रविवार को दोपहर में गंगा के पावन तट पर जोहरगंज स्थित श्मशान पर गार्ड आफ ऑनर के साथ किया गया। एडीएम अरुण कुमार सिंह और एसपी सिटी ज्ञानेंद्र ने माल्यार्पण कर उन्हें अंतिम विदाई दी। वहीं, सेना के जवानों द्वारा बजाई जा रही मातमी धुन और जवान बेटे को पंचतत्व में विलीन होता देख पिता राम सकल यादव की आंखें एक बार फिर भर आई। मौके पर उपस्थित जवान के दोनों छोटे बच्चे अंश (7) और आयुष (5 ) की स्थिति देख मौके पर जुटी भीड़ भी अपनी आंखों के आंसू रोक नहीं पा रही थी।