आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हर घर तिरंगा फहराने को लेकर झंडा बनाने का कार्य जोरों पर चल रहा है। रेवतीपुर ब्लाक क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को तिरंगा झंडा बनाने लक्ष्य दिया गया है। ब्लाक क्षेत्र की 40 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तिरंगा बनाने का काम कर रही हैं। हरेक महिला 50 से अधिक तिरंगा बना रही है। जिनको इससे रोजाना 500 से 700 रुपये तक की आमदनी हो जाती है।
ब्लॉक की समूहों को तीस हजार झंडे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। यह काम 31 जुलाई तक पूरा कर लेना है। अभी तक रेवतीपुर ब्लाक में 10500 झंडा तैयार हो चुके हैं। लक्ष्य को पूरा करने के लिए महिलाएं काफी मेहनत कर रही हैं। मालूम हो कि आजादी के 75 वीं वर्षगांठ पर अमृत महोत्सव को मनाते हुए हर घर तिरंगा कार्यक्रम का आयोजन होना है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कहना है कि वह तिरंगा बनाकर काफी खुश हैं साथ ही इसे बनाकर काफी गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। सरकार के इस फैसले से देश का सम्मान काफी बढ़ेगा। बीडीओ सुरेंद्र सिंह राणा ने बताया कि ब्लॉक को तीस हजार झंडा बनाने का लक्ष्य मिला है। अब तक दस हजार पांच सौ झंडे मैयार हो चुके हैं। समय रहते लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक तिरंगा बनाने का काम करते हैं। इस बीच घर-परिवार और बच्चों को भी देखभाल करना होता है। इसके बावजूद एक दिन में 70 से 75 तिरंगा बना लेते हैं।
रीमा देवी, उतरौली
सुबह सूरज निकलने से किरण डूबने तक तिरंगा बनाने का काम करते हैं। इस दौरान दो बच्चों को स्कूल भेजना भी होता है। दिनभर तिरंगा बनाने का काम हो रहा है। इससे अच्छी आमदनी हो जा रही है। एक झंडा पर 10 से 12 रुपये बचता है।
रीना सिंह, नूरपुर