मनिहारी। सिद्धपीठ हथियाराम मठ की शाखा मां काली धाम हरिहरपुर में महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति महाराज के संरक्षकत्व में नवरात्र महोत्सव में आध्यात्म की गंगा बह रही हैं। काशी के विद्वान ब्राम्हणों के यज्ञ कुंड में स्वाहाकार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। महामंडलेश्वर ने प्रवचन करते हुए कहा कि ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इसे तप का आचरण करने वाली भी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों की तप शक्ति बढ़ती है। ऐसी मान्यता है कि जो माता ब्रह्मचारिणी का पूजन-अर्चन श्रद्धा से करता है, उसकी इंद्रिया उसके नियंत्रण में रहती हैं। मां की तपस्या या ध्यान लगाने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही भय दूर होता है। जहां पर प्रेम होता है, वहां शांति होगी। जिस परिवार में प्रेम होगा, उस परिवार में शांति होगी। इस दौरान आचार्य सुरेशचंद्र तिवारी, आचार्य संजय पांडेय, आचार्य बालकृष्ण पांथरी, रामानंद व्यास, लक्ष्मीकांत द्विवेदी, मनोज शास्त्री, सतीश अग्निहोत्री, शांतेश्वर मिश्र, आशुतोष शास्त्री, बृजेंद्र पांडेय, मनोहर शास्त्री आदि उपस्थित थे।