गाजीपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण को लेकर हालांकि शासन स्तर पर कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन शासन से मिलने वाले संकेत के आधार पर ग्राम पंचायतों में 2015 के आधार पर आरक्षण मिलेगा। वर्ष 2015 में जो ग्राम पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी उस पर उसका आरक्षण नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर अगर कोई ग्राम पंचायत 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी तो इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होगी। जिन पंचायत में आरक्षण जस का तस होगा उसमें पुराने जनप्रतिनिधियों की बल्ले-बल्ले होगी लेकिन जिन दावेदारों के आरक्षण बदल जाने के कारण उनके चुनाव लड़ने की स्थिति नहीं बन पाएगी उनके लिए मायूसी होगी। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का फॉर्मूला भी चुनाव लड़ने वाले कई लोगों के मंसूबे को पस्त करेगा। जिले में ग्राम पंचायत प्रधान पद की 1237, जिला पंचायत सदस्य की 67 और ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या 15667 है। जिला पंचायत अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुखों के आरक्षण के लिए सबसे पहले जिला पंचायतों को एसटी/एससी और ओबीसी की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में सूचीबद्ध किया जाएगा। आरक्षण के इस क्रम को 1995 से 2015 तक आरक्षण की स्थितियों का अवलोकन करते हुए इन वर्गों के लिए इस बार आरक्षित नहीं किया जाएगा। जिले में नगर पालिका एवं नगर पंचायत की सीमाओं का विस्तार नहीं हुआ है। इसलिए यहां त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में परिसीमन के चलते किसी पंचायत में बदलाव की स्थिति नहीं बन रही है। औड़िहार संवाददाता के अनुसार जिला एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने वाले दावेदार पूरी ताकत से अपनी इच्छा के अनुरूप पंचायतों का आरक्षण बरकरार रखने तो कुछ पंचायतों में आरक्षण बदलवाने के लिए जिले से लेकर लखनऊ तक डेरा डाले हैं। जिले में पंचायतों का आरक्षण डीपीआरओ स्तर से तय होकर जिलाधिकारी की संस्तुति पर आगे बढ़ेगा। इसके लिए दावेदार तमाम तरह के जतन कर रहे हैं। सैदपुर की 98 ग्राम पंचायतों में पिछली बार 28 महिलाएं प्रधान बनी थी। इस बार 30 से 35 महिलाएं प्रधान पद की दावेदारी के लिए डटी हुई हैं। इस बार के आरक्षण में रोटेशन क्रम के हिसाब से आरक्षण बदलता पहै तो दर्जनों मौजूदा ग्राम प्रधानों को मायूस होना पड़ेगा। आरक्षण के बदलाव से 35 से ज्यादा ग्राम प्रधान ओबीसी के होंगे। सामान्य वर्ग के प्रधानों को आरक्षण को लेकर बड़ी उत्सुकता है लेकिन शासनादेश जारी न होने से ब्लॉक और जिला स्तर पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी दावे के साथ कुछ नहीं कह पा रहा है। ऐसे में चुनाव लड़ने के उत्सुक दावेदार आरक्षण को लेकर कम परेशान नहीं है। सैदपुर क्षेत्र के विक्रमपुर, भटोला, गौरी, शादी-भादी, फुलवारी कला, मुड़ियार, औड़िहार आदि ग्राम पंचायतों में आरक्षण को लेकर सबकी निगाहें टिकी हैं। अगर इस बार भी ग्राम पंचायतों में प्रधान पद की सीट सामान्य रही तो पिछले बार के प्रधानों को कड़ी चुनौती मिल सकती है।