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यज्ञ से प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं देवता

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सुहवल। स्थानीय गांव स्थित चारो धाम परिसर में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीरामचरितमानस महायज्ञ एवं रुद्र महायज्ञ भंडारा, हवन-पूजन एवं प्रवचन के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। इस अवसर पर कथा वाचक भागवताचार्य हरिप्रकाश महाराज ने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों के बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथा वाचक ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात एवं तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि एवं चित्त को निर्मल कर देता है। इस अवसर पर भाजपा नेता रिद्धिनाथ पांडेय, विनोद गुप्ता, विनोद कुशवाहा, रामअवध, जीवेंद्र नारायण शुक्ला राजेश सिंह, प्रेमशंकर, डब्बू राय आदि मौजूद थे।
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